00:23ुपूर्योधन को लगा कि आगे साफ पानी का तालाब है
00:27और उसने अपने वस्त्र उपर उठा लिये
00:30लेकिन अगले ही पल पानी समझ कर उसने पैर रखा और वह ठोस फर्ष पर धड़ाम से गिर पड़े
00:36ठीक इसके विपरीत कुछ ही दूरी पर जब वे आगे बढ़े तो एक असली तालाब को उन्होंने फर्ष समझ लिया
00:43और देखते ही देखते दुर्योधन पूरी तरह से पानी में भीग गए जिससे चारों तरफ सन्नाट आचा गया
00:49यह सब देखकर महारानी द्रॉपदी से रहा नहीं गया और उन्होंने व्यंग्य में एक ऐसा कटाक्ष किया
00:56रॉपदी ने कहा अंधे के पुत्र भी अंधे ही होते हैं और यही व्यंग्य कुरुक्षेत्र की चिंगारी बना ऐसे ही
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