00:02पित्रपक्ष की शुरुवाद 26 सितंबर से हो रही है और 10 अक्टूबर तक पित्रपक्ष रहेगा इन 16 पवित्र दिनों में
00:11लोग अपने पूरवजों का श्राद्द करते हैं और उनका अशरवाद लेते हैं
00:14अगर आप भी अपने पितर का इस साल श्राद्द करने की सोच रहे हैं या उन्हें तरपन करने का सही
00:21नियम जानना चाहते हैं तो आईए इस वीडियो में आपको बताते हैं कि जल तरपन के वक्त हाथ की सही
00:28मुद्रा क्या रहेगी साथ ही इसकी बेहत सरल पूरी विधी क्या ह
00:33शास्त्रों के अनुसार हतेली में अंगूठे और तरजनी अंगूली के बीच का हिस्सा पितरी तीर्थ कहलाता है
00:40पित्रों को तरपन देते समय इसी स्थान से जल अर्पित करें
00:44तरपन के लिए पहले कुशा की अंगूठी बना कर उसे अनामिका उंगली में धारन करें
00:49फिर हात में काले तिल मिला हुआ दूद, गंगा जल, सुपारी, सिक्का और लाल फूल लेकर संकल पलें
00:55फिर जल को धीरे-धीरे अंगूठे और तरजनी उंगली के बीच मौजूद पित्री तीर्थ से धीरे-धीरे पात्र में गिरा
01:02है
01:02इस तरह कि ये जाने वाला तरपन सीधे पित्रों तक पहुँशता है
01:07भवश पुरान के मताबिक दाहीने हाथ की उंगलियों के अगर भाग को देवतीर्त कहते हैं
01:13देवी देवताओं को गंगा जल या कोई अन्य वस्तु अरपित करते समय उंगलियों के आगे वाले हिस्से से अरपन करने
01:20की परमपरा है
01:21इसलिए पूजा के दोरान भगवान को जल या अन्य सामगरी चड़ाते समय उसे हतेली के बीच के बजाए उंगलियों के
01:29अगर भाग से अरपित किया जाता है
01:31मही दाहीने हतेली में कनिष्ठा यानि सबसे छोटी उंगली के नीचे का हस्सा रिशी तीर्त कहलाता है
01:45रिशी तीर्त से किया गया अरपन या दान पुन्यकारी और फलदाई है
01:49मानेता है कि इस स्थान से अरपन करने से सवभगे की प्रापती होती है
01:55साथी आपको बता दें कि महिलाएं भी अपने माता पिता या पित्रों के लिए तरपन कर सकती है
02:02फिलहाल इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक और शेयर करें
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