00:10पंजाब के बठिंडा जिले का यह छोटा सास सेखो गाउं आज पूरी देश के लिए महिला सशक्ती करण की एक
00:17अद्भुद मिसाल बन चुका है
00:19इस गाउं की पहचान बदल दी है शरब जीत कौर ने शारिरिक दिव्यांगता के बावजूज शरब जीत ने कभी हार
00:26नहीं मानी आज वो खुद तो आतनिर्भर है ही साथ ही अपने इट्राइसाइकल पर बैठ कर रोज गाउं गाउं जाती
00:34है और महिलाओं को खुद के पैरो
00:36पर खड़ा होने की प्रेड ना देती हैं करीब 6 साल पहले घर की चार दिवारी में सिलाई करने वाली
00:42शरब जीत साल 2018 में स्वैंग सहायता समूह से जुणी शुरुआत में महिलाओं को समझाना आसान नहीं था जब महिलाओं
00:51ने घर के काम का बहाना बनाया तो शरब जीत न
00:58सब की सूच बदल दी बच्पन से ही मुझे पोलियों हो गया था मैंने महलाओं को समझाया कि आत्म निर्वर
01:05बनने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की अवश्यक्ता नहीं होती बलकि छोटे छोटे प्रयास भी मिलकर बड़ा बदलाव ला सकते
01:13हैं इन प्रयासों से महला
01:27को कॉर्परेट संस्था HMEL का साथ मिला आज इस गाओं की महिलाएं सिर्फ चूला चौका नहीं सभालती बलकि उनके हाथों
01:37में स्वरोजगार की कमान है गाओं में आज बेकरी, पशुचारा, सिलाई, बैग बनाने और नोटबुक तयार करने जैसी करीब 10
01:46छोटी इंडस्
01:57से 15,000 रुपे तक कमा रही हैं, शरबजीत की इस जिद ने न केवल इन महिलाओं को मान सम्मान
02:03दिलाया वलकि उनके परिवारों को एक मजबूत आर्थिक सहारा भी दिया
02:08शरबजीत कॉरद्वारा दिखाए गए मात के कारण ही, वा आज अपने पैर उपर खड़ी हैं
02:13हमने समाज में एक अलग दर्जा स्थापित करने में भी महत्पुन योगदान दिया है
02:17आज घरे लुकावों के साथ सार हम स्वयं सहायता समुहों में काम करके प्रतिमा 10 से 13 हजार रुपए की
02:25आय कमा ले रही है
02:27शरबजीत आज एक कॉमिनिटी को ओडिनीटर के तौर पर काम कर ही है
02:31उन्हें हर महिने बकायदा सालरी मिलती है जिससे वो अपने बेटे को उच्चो सिक्षा दिलाना चाहती है
02:38शेखो गाउं की यह कहानी सावित करती है कि अगर इरादों में दम हो तो हर बाधा को काम्याबी की
02:45सीड़ी बनाया जा सकता है
02:47ETV भारत के लिए बठिंडा से अमंदीब घोशल की रिपोर्ट
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