00:03जिस घर में पढ़ाई का सफर दूसरी क्लास में ही थम गया था, जहां मा के लिए स्कूल की चोखट
00:09तक पहुचना भी मुम्किन नहीं हुआ, उसी घर के पांच बच्चे डॉक्टर बनने की राह पर हैं।
00:15ये कहानी है उडिशा के कंधमाल के एक दूर दराज आदिवासी गाओं की। कंधमाल के डारिंग बाड़ी ब्लॉग के सीका
00:24बाड़ी गाओं में रहते हैं बुर्सी प्रधान और उनकी पतनी अनुसूया।
00:29बुर्सी ने सिर्फ दूसरी क्लास तक पढ़ाई की जबकि अनुसूया को कभी स्कूल जाने का मौका तक नहीं मिला। लेकिन
00:36दोनों ने अपनी अधूरी पढ़ाई का दर्द बच्चों के सपनों की ताकत में बदल दिया।
00:42सबसे बड़े बेटे विभीशन प्रधान ने परिवार के इस सपने को पहली बड़ी काम्याबी दिलाई।
00:48कोरा पुट के शहीद लक्षमन नायक मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल से उन्होंने MBBS पूरा किया, जहां अब वो इंटरन्शिप कर
00:57रहे हैं।
00:58विभीशन की काम्याबी ने जैसे छोटे भाई बेहनों के लिए भी रास्ते में पहला दीपक जला दिया।
01:04बेहन मोनालीसा प्रधान भी उसी रहा पर आगे बढ़ी और फिलहाल उसी मेडिकल कॉलेज में MBBS के दूसरे साल में
01:11पढ़ रही है।
01:12इस साल परिवार के तीन छोटे सदस्य, इसारिया प्रधान, सुनेमी प्रधान और मिनाक्षी प्रधान ने नीट परिक्षा पास की और
01:20मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लिया।
01:23हाला की अनुसोया को बच्चों की आर्थिक जरूरते पूरी करने की चिंता है, लेकिन परिवार इस मुश्किल का सामना करने
01:31के लिए पूरी तरह तयार है।
01:33ये सिर्फ नीट पास करने की कहानी नहीं है। ये कहानी है सालों के त्याग की, दिन रात की मेहनत
01:40और उस जिद की जिसने हालात को अपने सपनों के रास्ते की दिवार नहीं बनने दिया।
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