00:00मूर्ति के लिए बड़ा सुन्दर है, खुसरोगा है, अपनी अच्छवी बनाए के, जो मैं पी के पास गई, उनको देखो,
00:09तो दिखाई दे के हम किसी लायक नहीं, हमने अपने आपको कितना भी सजा बजा रखा हो, जो अच्छवी देखी,
00:16पी उकी, मैं अपनी भूल गई,
00:18हम बहुत बनते थे, हम ये हैं, तुर्रम खाँ हैं, ऐसे हैं, वैसे हैं, और उनको देखा तो समझ में
00:24आया हम कुछ नहीं है, और ये बात कोई हुमिलियेशन की नहीं है, ऐसा नहीं कि किसी ने हमारी आउमानना
00:33कर दी, ये बात जैसे प्रेम का अमंत्रन है कि तुम भी उठ
00:38और हमारी जैसे सुन्दर बन जाओ, तुम भी उठो और हम में ही समाज आओ, हम तुम एक हो जाएं,
00:45ये बात है अच्छवी की, जो सामने दिखाई दे रहा है, उसके पाओं पखारने भर से क्या होगा, प्रेम में
00:54पाओं ही नहीं पखारे जाते, प्रेम में तो एक हो जाते
00:59हैं, योग उसी का नाम है
Comments