00:00भीड कठा कर लो 500,000 लोगों की न तो सबको ऐसा लगता है कि हम में बड़ी ताकत है
00:06मास साइकोलोजी, साइकोलोजी आफ दा क्राउड कभी पढ़ना
00:11एकदम फुदूलाल भी पहुँच जाएगा तो उसको ऐसा लगता है कि आज मुझे बहुत ताकत आ गई
00:15ताकत कहां से आ रही अपने आसपास 2-4,000 लोग देख रहे हो आपको लगता है हम भी कुछ
00:18हो गई
00:19ये आदमी अपने अकेले पन में फिर कापेगा
00:24ये आदमी वही है जो रात में भूत के डर के मारे पिशाप करने नहीं जा सकता
00:27पर भीड में इक अठा कर दो तो ये भी ऐसा हो जाएगा कि मैं खूंखार विद्रोही हूँ
00:32ये जैंजी 80 प्रतिशत लोग इसके अभी अभी मावाब के पैसों पर पलते हैं
00:39कैसे विद्रोह कर लोगे तुम? कौन सा विद्रोह कर लोगे तुम?
00:43पर जब मैं बोलता हूँ जाकर विद्रोह करो तो विद्रोह का मतलब तुम समझते हो
00:47कि बाहरी किसी सत्ता के खिलाब विद्रोह कर देना है
00:50मैं जिस विद्रोह की मांग कर रहा हूँ उसमें ज्यादा ताकत, ज्यादा जान, ज्यादा हिम्मत लगती है
00:58नहीं तो एकदम कमजोर किस्म के भी हजार लोग एक साथ खड़े कर दो उनको भी लगता है शक्तिका संचार
01:05हो गया और उनको अकेला कर दो उनसे अकेरे में बात करो तो पाओगे कुछ नहीं
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