00:00अपने शरीर की ऐसी हालत आने मत दो कि किसी से और्गन्स लेने पड़ें।
00:06बहुत वज़े हैं पहली बात तो जीवन ऐसा क्यों जीना कि शरीर खराब कर लो।
00:13वो ट्रांस्प्लांट वाला उपरेशन एक दिन होता है लेकिन उसके पहले की एक लंबी कहानी होती है न।
00:31आपकी और से उसको रोका नहीं आ सकता था और आटो इम्यून था से न।
00:48तो ऐसी अपनी हालत आने मत दो कि संसार के आगे इस हद तक याचक बनना पड़े कि मुझे आंगदान
00:55हो और अगर ऐसी जरूरत आ गई है
00:58तो विवेक रहे और सतरकता रहे
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