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  • 2 months ago
जिंदगी चलती रहती है, ठीक वैसे ही जैसे रसुवा में पारंपरिक पानी से चलने वाली इस चक्की के पत्थर घूमते रहते हैं। ये पत्थर नेपाल के ऊपरी हिमालयी इलाके में मक्का, दाल और दूसरे कई तरह के अनाज पीसने के लिए लगभग बिना रुके घूमते रहते हैं. तिब्बत से अचानक आई बाढ़ को अभी मुश्किल से एक हफ्ता ही बीता है। इस बाढ़ ने रसुवा और मध्य नेपाल के बड़े हिस्से में तबाही मचाई और मौत का मंजर छोड़ दिया। हालांकि रसुवा के शिखरबेशी इलाके में स्थित सदियों पुरानी तकनीक वाली यह चक्की आपदा के बीच भी बिना रुके काम कर रही है और प्रभावित लोगों के लिए अनाज पीसकर भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है.

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00:30हलकी रस्वा के शिखर बेशी इलाके में इस्थित सद्यों पुरानी तक्नीक वाली ये चक की आपता के बीज भी बिना
00:37रुके काम कर रही है और प्रभावित लोगों के लिए अनाज पीश कर भोजन की उपलब्दता सुनिश्चित कर रही है
01:17जैसे जैसे रस्वा विनाशकारी बाड से उभरने की लंबी रह पर आगे बढ़ रहा है चक्की का पहिया घूमता रहता
01:24है
01:24इसे पहारों से आने वाला वो पानी चलाता है जिसने पीडियों से इलाके के इन लोगों को सहरा दिया है
02:12अगस्त को नेपाल दिब्बत सीमा के पास गलेशियर और चट्टा ने टूटने से आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध
02:19नेपाल के कजबों और गावों को तबाह कर दिया
02:22देश के कई कजबों और गावों में अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही में 1200 से जादा लोगों की मौत
02:29हो चुकी है और लगभग 5000 लोग अब भी लापता है

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