00:0013 साल की IAS सेवा से दिव्या मित्तल ने दिया इस्तीफा
00:05लंदन की नौकरी छोड़ कर बनी थी IAS
00:09भावुक पोस्ट में किया बड़ा खुलासा
00:11उत्तर प्रदेश की 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने इस्तीफा दे दिया है
00:17करीब 13 साल थक प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद उन्होंने अपनी इच्छा से IAS की नौकरी छोड़ने का फैसला
00:24किया
00:24दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट शेयर कर अपने पूरे सफर को याद किया है
00:30उन्होंने लिखा कि उन्होंने 13 वर्शों की इस अविस्मरणिय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम दिया है
00:35इस पोस्ट में दिव्या ने इस सफर से जुड़ी हर बात को लोगों के साथ साजह किया है
00:40सोशल मीडिया साइट एक्सपर उन्होंने लिखा की
00:44आज मैंने IAS से स्तीफा देकर 13 साल के एक यादगार सफर से अपनी मर्जी से विदाई ली है
00:49साधारन माहौल में पले बढ़े होने के कारण मैंने एक अच्छी और सफल जिंदगी का सपना देखा था
00:55IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर में कड़ी महनत से पढ़ाई करने के बाद मुझे लंदन में नौकरी मिल गई
01:01लेकिन सब कुछ पा लेने के बाद भी कुछ अधूरापन महसूस होता था
01:04अपने देश से दूर रहने का बोज मुझ पर था
01:07मेरी शिक्षा, मेरा आत्म विश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठा कर चलने की हिम्मत
01:12ये सब इसी मिट्टी का कर्स था
01:14उस कर्स को चुकाना जरूरी था
01:16मैं चाहता था कि जिस भारत का सपना मैंने देखा था
01:18उसे बनाने वाली इंटों पर मेरे भी हाथ की छाप हो
01:21इसलिए मैं वापस लोटा और सौभाग्य से IAS अफसर बना
01:25मुझे बहुत कुछ करने का मौका मिला और उससे भी ज्यादा सीखने को मिला
01:29देवरिया ने मुझे सिखाया कि सही का साथ देना कोई विकल्प नहीं बलकि एक फर्ज है
01:33मिर्जापुर ने सिखाया कि असंभव कोई सच्चाई नहीं बलकि सिर्फ एक राय है
01:38और मा विंधिवाशनी के चरणों में बैट कर मैंने सीखा कि असली ताकत किसी पद से नहीं
01:43बलकि उनकी कृपा और लोगों के भरोसे से मिलती है
01:46सबसे बड़ी सीख ये थी कि जो सपने मैंने कभी अपने लिए देखे थे
01:50वे तो पूरे हो चुके थे
01:51अब उन सपनों को जीने का समय था जो मैंने अपने लोगों के लिए देखे थे
01:55इस जिंदगी का असली सुकून उन आँखों में जलकता था
01:58उस परिवार की आँखों में जिन्हें पहली बार जमीन का अधिकार मिला
02:02उस दिव्यांग व्यक्ति की आँखों में जिसे सम्मान के साथ जीने का मौका मिला और उस किसान की आँखों में
02:07जिसके खेतों तक आखिरकार पानी पहुँचा।
02:10उनके संघर्षों के साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक इनसान होता है और उनकी
02:16गरिमा बनाए रखना ही असल में न्याय है।
02:18मैं बेवकूफ था जो सोचता था कि मैं कुछ देने आया हूँ। सच तो ये है कि मैंने सबसे ज्यादा
02:24पाया और वो कर्ज और गहरा होता गया।
02:48मेरे साथ खड़े रहे। आज मेरी आँखें कृतग्यता से नम हैं। बस एक ही द्रिश्य मेरी आँखों में बसा हुआ
02:54है।
02:54लहुरिया डीह पहाडी की वो बुजर्ग मां जिन्होंने अपने गाउं में पहली बार पानी पहुँचते देख कुछ नहीं कहा।
03:00लेकिन कांपते हाथों से मेरे सिर को छुआ और आशिरवाद दिया। आज भले ही वो पद पीछे छूट जाए।
03:06लेकिन वो सपर्ष इस जीवन में कभी मेरा साथ नहीं छोड़ेगा और वो सपना भी कभी नहीं छूटेगा जो मुझे
03:11इस देश की मिट्टी ने दिया है।
03:38प्राइब कर देश विज चुनूट अब्सक्राइब कर दो आट्टी नहीं सब्सक्राइब करें पर दोल्टाइब करेंट जाए।