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उत्तराखंड में आपदा का मतलब सिर्फ सड़कें टूटना या गांवों में पानी भर जाना नहीं है। पहाड़ों में एक बड़ी आपदा का असर सीधे घर, रोजगार, खेती, बागवानी, अस्पताल, स्कूल और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।

इस एक्सप्लेनर में हम समझेंगे कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार उत्तराखंड में Disaster Management को किस तरह Rescue, Relief, Rehabilitation और Resilience के चार स्तरों पर आगे बढ़ाने की बात कर रही है।

धाराली और थराली में आई आपदा के बाद राहत और बचाव के साथ-साथ सड़क, बिजली और पेयजल जैसी जरूरी सेवाओं को बहाल करने पर जोर दिया गया। राज्य सरकार के मुताबिक, राहत, पुनर्वास और विकास के लिए 33 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि प्रतिबद्ध की गई है।

फोकस सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं रहा। प्रभावित परिवारों की आजीविका दोबारा शुरू कराने के लिए खेती, बागवानी और पशुपालन से जुड़ी सहायता भी दी गई।

इस वीडियो में हम जोशीमठ भू-धंसाव संकट को भी देखेंगे—राहत, पुनर्वास, वैज्ञानिक अध्ययन और भविष्य में ज्यादा मजबूत निर्माण की कोशिशों के संदर्भ में।

आखिर Dhami Model क्या है? क्या उत्तराखंड सिर्फ आपदा के बाद राहत दे रहा है या अगली आपदा के लिए भी तैयारी कर रहा है?

देखिए पूरा एक्सप्लेनर।




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Transcript
00:04उत्रा खंड में आबदा का मतलब सिर्फ सड़क तूटना पुल बहना या गाउं में पानी भर जाना नहीं है
00:10पहाड में एक सड़क बंद होती है तो उसका मतलब है किसी गाउं का बाजार से संपर्ख तूटना
00:17बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना या मरीज का अस्पताल तक पहुँचना मुश्किल हो जाना
00:23यही वज़े है कि मुख्यमंत्री पुशकर सिंग धामी की सरकार डिजास्टर मानेजमेंट को
00:29सिर्फ रेस्क्यू और रिलीव तक सीमित रखने के बजाए रिहाबिलिटेशन और रेजिलियन से जोडने की कोशिश कर रही है
00:36सरकार इसे धामी मौडल अप दिसास्टर मानेजमेंट के तौर पर पेश कर रही है
00:41इस मौडल का मूल विचार है पहले जान बचाईए फिर ज़रूरी सेवाएं बहाल कीजे और उसके बाद लोगों को दुबारा
00:51अपने पेरों पर खड़ा होने में मदद कीजे
00:53धराली और धराली में आई आपदाओं के बाद सरकार की इसी रणनीती को परखा गया
01:03रेस्क्यू से रिहाबिलिटेशन तक जब धराली धराली और आसपास के इलाकों में फ्लैश फ्लड्स और डेब्री फ्लोज ने तबाही मचाई
01:12तो SDRF, NDRF, SENA और स्थानिय प्रशासन को रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया गया
01:19लेकिन पहार में रेस्क्यू सिर्फ लोगों को सुरक्षित निकालने तक खत्म नहीं होता
01:25सडक तूटने का मतलब है गाउं का संपर्ख तूटना
01:29बिजली और पानी की लाइन तूटने का मतलब है पूरी आबादी प्रभावित होना
01:34और अगर खेत, बागान और पशुधन प्रभावित हो जाएं तो परिवार की आये पर सीधा असर पड़ता है
01:41इसलिए सरकार का दावा है कि राहत के साथ-साथ सडक, बिजली, पानी और आजीवका की बहाली पर भी फोकस
01:50किया जाए
01:50मुख्य मंत्री ने प्रभावित इलाकों की स्थिती की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को मुआबजे और इंफ्रास्ट्रॉक्ट्रॉक्ट्र रेस्टॉरेशन में देरी नहीं
02:01करने के निर्देश दिये
02:02धराली, हर्शल, भटवाडी और धराली जैसे इलाकों में प्राथमिक्ता रही, कनेक्टिविटी बहाल करना और प्रभावित परिवारों को दुबारा आर्थिक गतिविधियों
02:14से जोड़ना
02:14राज्य सरकार के मुताबिक आबडा के बाद राहत, कुनरवास और विकास के लिए 33 करोड से जादा की राशी कमिट
02:22की गई
02:22इसमें करीब 16 करोड अग्रिकल्चर, होटे कल्चर, इरिगेशन, अनिमल हस्बंडरी, रूरल डेवलाप्मेंट, एनरजी, टूरिजम और पब्लिक वर्क्स जैसे विभागों के
02:33जरिये खर्च किये गए
02:34वहीं 17 करोड से ज्यादा की राशी विभिन राहत उपायों के तहट प्रभावित परिवारों तक पहुचाए गए
02:42लेकिन पहाड में असी चुनोती सिर्फ घर या सड़क दुबारा बनाना नहीं है
02:48किसी परिवार का बागान उसकी आय है पशुधन उसकी पूंजी है और खेती उसके भवश्र का आधार
02:56इसलिए सरकार की ओर से डामिज ओचर्ड के लिए कॉंपनसेशन गोट और शीप रियोरेंग के लिए सपोर्ट
03:03क्रॉप्स और सैपलिंग्स की मदद और अग्रिकल्ट्रल अक्टिविटीज को रिस्टार्ट करने के लिए उपाय किये गए
03:10यानि लक्ष सिर्फ ये नहीं था कि लोगों को नुकसान का मुआफ़जा मिले
03:15लक्ष ये था कि लोग फिर से कमाना शुरू कर सकें
03:22लेकिन पहले से जादा रिजिलियंट और यहीं से धामी मॉडल का दूसरा हिस्सा सामने आता है
03:28सरकार का कहना है कि रिकंस्ट्रक्शन का मतलब सिर्फ वही चीज दुबारा बना देना नहीं है
03:34जो आपदा में तूट गई क्योंकि उत्तरा खंड एक बेहत फ्रिजाइल हिमालियन एकोसिस्टम में स्थित है
03:41यहां सड़क बनाते समय स्लोक स्टिबिलिटी, ड्रेनेज रिवर बिहेवियर और लैंड्सलाइड रिस्क को धान में रखना जुरूरी है
03:49इसलिए सरकार टेखनोलोजी बेस मॉनिटरिंग, अर्ली वनिंग सिस्टम्स, वेदर ट्राकिंग और मॉनसून प्रिपेर्डनेस पर जोर दे रही है
03:58साथ ही लैंड्सलाइड मिटिगेशन, रिवर बैंक प्रोटेक्शन और मजबूत माउंटन इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काम किया जा रहा है
04:06स्थानिय फर्स्ट रिस्पॉंडर्स को ट्रेनिंग और एक्विप्मेंट देने की कोशिश भी इसी स्ट्राटेजी का हिस्सा है
04:13यानि संदेश साफ है
04:16आबदा का इंतजार मत कीजिए, आबदा से पहले तयारी कीजिए
04:21जोशी मत, सबसे बड़ा टेस्ट
04:25और ये अप्रोच धराली से शुरूर नहीं हुई
04:28इसका बड़ा टेस्ट था
04:29जोशी मत, लैंड सबसिडेंस, प्राइसिज
04:322022 के अंत और 2023 की शुरुआत में जब स्थिती गंभीर हुई
04:38तो vulnerable buildings में रह रहे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया
04:44इलाके को danger, buffer और completely safe zones में बाटा गया
04:49कुछ बेहत खतरनाक structures को controlled तरीके से demolish भी किया गया
04:55प्रभावत परिवारों को 4000 रुपे महीने का rent support
04:5915,000 रुपे का interim payment
05:02और crisis zone में electricity और water bills में राहत दी गई लेकिन जोशी मत में
05:09सरकार ने सिर्फ compensation पर निर्भर रहने की बजाए scientific assessment पर भी जोड़ गया
05:15Geological Survey of India, National Institute of Hydrology, Vadia Institute of Himalayan Geology, CSIR, CBRI
05:24और IAT Roorkee जैसे संस्थाओं को भी assessment process में शामिल किया गया
05:29Long term rehabilitation के लिए प्रभावित परिवारों के सामने
05:34Financial compensation, land और building compensation तथा safer locations पर government built houses जैसे विकल्प रखे गए
05:43इसके इलावा 1658 करोड से जादा का recovery और reconstruction plan भी मनजूर किया गया
05:51The bigger धामी model तो आखिर धामी model है क्या
05:56सरल शब्दों में rescue, relief, rehabilitation और resilience
06:02यानि सरकार का डावा है कि disaster management को सिर्फ emergency response नहीं
06:07बलकि long term recovery और future preparedness से जोड़ने की कोशिश की जा रही है
06:13हालांकि उत्राखंड की चुनोती बहुत बड़ी है
06:17Climate change, extreme weather, fragile mountain slopes, rapid construction और हिमालियन ecology पर बढ़ता दबाव
06:26इन सब के बीच सवाल सिर्फ ये नहीं है कि सरकार आपदा के बाद कितनी जल्दी पहुँचती है
06:33सवाल ये भी है कि क्या reconstruction अगली आपदा के सामने जादा मजबूत साबित होगा
06:40आखिरकार पहाड में किसी सरकार की असी परिक्षा rescue operation खत्म होने के बाद शुरू होती है
06:47क्या परिवार फिर से अपने घर लोट पाए
06:51क्या उनकी आजजीविका वापस आई
06:54क्या सडक, पानी और बिचली स्थाई रूप से बहाल हुए
06:59और क्या अगली आपदा के लिए तैयारी पहले से बहतर है
07:03यही धामी model की असी कसोटी भी होगी
07:07क्योंकि उत्राखंड में resilience का मतलब सिर्फ आपदा से बचना नहीं है
07:12बलकि आपदा के बाद फिर खड़े होना
07:14और अगली चुनाथी के लिए पहले से मजबूत होना है
07:18Protect the people, restore what was lost and build a more resilient उत्राखंड
07:25यही है धामी model का मूल संदेश
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