00:04उत्रा खंड में आबदा का मतलब सिर्फ सड़क तूटना पुल बहना या गाउं में पानी भर जाना नहीं है
00:10पहाड में एक सड़क बंद होती है तो उसका मतलब है किसी गाउं का बाजार से संपर्ख तूटना
00:17बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना या मरीज का अस्पताल तक पहुँचना मुश्किल हो जाना
00:23यही वज़े है कि मुख्यमंत्री पुशकर सिंग धामी की सरकार डिजास्टर मानेजमेंट को
00:29सिर्फ रेस्क्यू और रिलीव तक सीमित रखने के बजाए रिहाबिलिटेशन और रेजिलियन से जोडने की कोशिश कर रही है
00:36सरकार इसे धामी मौडल अप दिसास्टर मानेजमेंट के तौर पर पेश कर रही है
00:41इस मौडल का मूल विचार है पहले जान बचाईए फिर ज़रूरी सेवाएं बहाल कीजे और उसके बाद लोगों को दुबारा
00:51अपने पेरों पर खड़ा होने में मदद कीजे
00:53धराली और धराली में आई आपदाओं के बाद सरकार की इसी रणनीती को परखा गया
01:03रेस्क्यू से रिहाबिलिटेशन तक जब धराली धराली और आसपास के इलाकों में फ्लैश फ्लड्स और डेब्री फ्लोज ने तबाही मचाई
01:12तो SDRF, NDRF, SENA और स्थानिय प्रशासन को रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया गया
01:19लेकिन पहार में रेस्क्यू सिर्फ लोगों को सुरक्षित निकालने तक खत्म नहीं होता
01:25सडक तूटने का मतलब है गाउं का संपर्ख तूटना
01:29बिजली और पानी की लाइन तूटने का मतलब है पूरी आबादी प्रभावित होना
01:34और अगर खेत, बागान और पशुधन प्रभावित हो जाएं तो परिवार की आये पर सीधा असर पड़ता है
01:41इसलिए सरकार का दावा है कि राहत के साथ-साथ सडक, बिजली, पानी और आजीवका की बहाली पर भी फोकस
01:50किया जाए
01:50मुख्य मंत्री ने प्रभावित इलाकों की स्थिती की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को मुआबजे और इंफ्रास्ट्रॉक्ट्रॉक्ट्र रेस्टॉरेशन में देरी नहीं
02:01करने के निर्देश दिये
02:02धराली, हर्शल, भटवाडी और धराली जैसे इलाकों में प्राथमिक्ता रही, कनेक्टिविटी बहाल करना और प्रभावित परिवारों को दुबारा आर्थिक गतिविधियों
02:14से जोड़ना
02:14राज्य सरकार के मुताबिक आबडा के बाद राहत, कुनरवास और विकास के लिए 33 करोड से जादा की राशी कमिट
02:22की गई
02:22इसमें करीब 16 करोड अग्रिकल्चर, होटे कल्चर, इरिगेशन, अनिमल हस्बंडरी, रूरल डेवलाप्मेंट, एनरजी, टूरिजम और पब्लिक वर्क्स जैसे विभागों के
02:33जरिये खर्च किये गए
02:34वहीं 17 करोड से ज्यादा की राशी विभिन राहत उपायों के तहट प्रभावित परिवारों तक पहुचाए गए
02:42लेकिन पहाड में असी चुनोती सिर्फ घर या सड़क दुबारा बनाना नहीं है
02:48किसी परिवार का बागान उसकी आय है पशुधन उसकी पूंजी है और खेती उसके भवश्र का आधार
02:56इसलिए सरकार की ओर से डामिज ओचर्ड के लिए कॉंपनसेशन गोट और शीप रियोरेंग के लिए सपोर्ट
03:03क्रॉप्स और सैपलिंग्स की मदद और अग्रिकल्ट्रल अक्टिविटीज को रिस्टार्ट करने के लिए उपाय किये गए
03:10यानि लक्ष सिर्फ ये नहीं था कि लोगों को नुकसान का मुआफ़जा मिले
03:15लक्ष ये था कि लोग फिर से कमाना शुरू कर सकें
03:22लेकिन पहले से जादा रिजिलियंट और यहीं से धामी मॉडल का दूसरा हिस्सा सामने आता है
03:28सरकार का कहना है कि रिकंस्ट्रक्शन का मतलब सिर्फ वही चीज दुबारा बना देना नहीं है
03:34जो आपदा में तूट गई क्योंकि उत्तरा खंड एक बेहत फ्रिजाइल हिमालियन एकोसिस्टम में स्थित है
03:41यहां सड़क बनाते समय स्लोक स्टिबिलिटी, ड्रेनेज रिवर बिहेवियर और लैंड्सलाइड रिस्क को धान में रखना जुरूरी है
03:49इसलिए सरकार टेखनोलोजी बेस मॉनिटरिंग, अर्ली वनिंग सिस्टम्स, वेदर ट्राकिंग और मॉनसून प्रिपेर्डनेस पर जोर दे रही है
03:58साथ ही लैंड्सलाइड मिटिगेशन, रिवर बैंक प्रोटेक्शन और मजबूत माउंटन इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी काम किया जा रहा है
04:06स्थानिय फर्स्ट रिस्पॉंडर्स को ट्रेनिंग और एक्विप्मेंट देने की कोशिश भी इसी स्ट्राटेजी का हिस्सा है
04:13यानि संदेश साफ है
04:16आबदा का इंतजार मत कीजिए, आबदा से पहले तयारी कीजिए
04:21जोशी मत, सबसे बड़ा टेस्ट
04:25और ये अप्रोच धराली से शुरूर नहीं हुई
04:28इसका बड़ा टेस्ट था
04:29जोशी मत, लैंड सबसिडेंस, प्राइसिज
04:322022 के अंत और 2023 की शुरुआत में जब स्थिती गंभीर हुई
04:38तो vulnerable buildings में रह रहे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया
04:44इलाके को danger, buffer और completely safe zones में बाटा गया
04:49कुछ बेहत खतरनाक structures को controlled तरीके से demolish भी किया गया
04:55प्रभावत परिवारों को 4000 रुपे महीने का rent support
04:5915,000 रुपे का interim payment
05:02और crisis zone में electricity और water bills में राहत दी गई लेकिन जोशी मत में
05:09सरकार ने सिर्फ compensation पर निर्भर रहने की बजाए scientific assessment पर भी जोड़ गया
05:15Geological Survey of India, National Institute of Hydrology, Vadia Institute of Himalayan Geology, CSIR, CBRI
05:24और IAT Roorkee जैसे संस्थाओं को भी assessment process में शामिल किया गया
05:29Long term rehabilitation के लिए प्रभावित परिवारों के सामने
05:34Financial compensation, land और building compensation तथा safer locations पर government built houses जैसे विकल्प रखे गए
05:43इसके इलावा 1658 करोड से जादा का recovery और reconstruction plan भी मनजूर किया गया
05:51The bigger धामी model तो आखिर धामी model है क्या
05:56सरल शब्दों में rescue, relief, rehabilitation और resilience
06:02यानि सरकार का डावा है कि disaster management को सिर्फ emergency response नहीं
06:07बलकि long term recovery और future preparedness से जोड़ने की कोशिश की जा रही है
06:13हालांकि उत्राखंड की चुनोती बहुत बड़ी है
06:17Climate change, extreme weather, fragile mountain slopes, rapid construction और हिमालियन ecology पर बढ़ता दबाव
06:26इन सब के बीच सवाल सिर्फ ये नहीं है कि सरकार आपदा के बाद कितनी जल्दी पहुँचती है
06:33सवाल ये भी है कि क्या reconstruction अगली आपदा के सामने जादा मजबूत साबित होगा
06:40आखिरकार पहाड में किसी सरकार की असी परिक्षा rescue operation खत्म होने के बाद शुरू होती है
06:47क्या परिवार फिर से अपने घर लोट पाए
06:51क्या उनकी आजजीविका वापस आई
06:54क्या सडक, पानी और बिचली स्थाई रूप से बहाल हुए
06:59और क्या अगली आपदा के लिए तैयारी पहले से बहतर है
07:03यही धामी model की असी कसोटी भी होगी
07:07क्योंकि उत्राखंड में resilience का मतलब सिर्फ आपदा से बचना नहीं है
07:12बलकि आपदा के बाद फिर खड़े होना
07:14और अगली चुनाथी के लिए पहले से मजबूत होना है
07:18Protect the people, restore what was lost and build a more resilient उत्राखंड
07:25यही है धामी model का मूल संदेश
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