00:07इरान एक ऐसा देश जिसके पास दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस भंडार है
00:13हजारों साल पूरानी सब्भ्यता है उच्छे शुक्षित युवा अबादी है और पश्चिम एशिया की सबसे प्रभावशाली से निताकतों में से
00:21एक है
00:22लेकिन आज भी यही देश महंगाई, गिर्ति मुद्रा, बेरोज़कारी, बजली संकट और अंतराष्ट्य प्रतिबंधों के दवाब में सास ले रहा
00:31है
00:31सवाल यह है कि क्या आर्थिक प्रतिबंध केवल सरकारों और बड़े उद्धियों को तक प्रभावित करते हैं
00:38या उनका असर सिधे उस परिवार तक भी पहुँचता है, जो हर महीने राशन खरीदने, बच्चों की फीज भरने और
00:46इलाज कराने की चुन्ता करता है
00:482026 का इरान केवल परमानु कारिक्रम, अमेरिका या फरपश्चिम देशों से टकराओ की कहानी नहीं है
00:55बलकि उन करोडों आम लोगों की कहानी है, जिने हर सप्ता बढ़ती कीमतों के बीच अपना पूरा घरेलू बजट बदलना
01:03पड़ता है
01:05तो आखिर इरान की ऐसी स्तिथी क्यूं है? इरान पर प्रतिबंध कब और क्यूं लगे? तेल का खज़ाना होते हुए
01:13भी इरान में आर्थिक संकट क्यूं है?
01:16मसकार, मेरा नाम है रिचापराशर और आप देख रहे हैं वनिद्या हैंती
01:19इरान की मौझूदा आर्थिक स्तिथी को समझने के लिए लगभग 47 साल बीचे जाना होगा
01:24वर्ष 1989
01:27उसमें इसलामिक रांती के बाद अमेरिका और इरान के रिष्टे पूरी तरह बदल गए
01:31उसी साल तेहरान स्थित अमेरिकी दूदावास में 52 अमेरिकी नागरिकों को बंधक बनाये जाने के बाद
01:38अमेरिका ने इरान पर पहली बार आर्थिक प्रतिबंध लगाए
01:41इसके बाद 1995 में अमेरिका ने इरान के तेल और उर्जा छेत्र में निवेश पर व्यापक प्रतिबंध लगा दी
01:49फिर 2006 से 2015 के बीज संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और यूरोपिय देशु ने इरान के परमाणू कारेक्रम को लेकर कई
01:59नए प्रतिबंध लगा रे
02:00जिनकी बज़े से इरानी बैंक अंतराष्ट्रे बैंकिंग प्रणाली से गट गए
02:05पिदेशी निवेश रुकाया और तेल निर्याद पर भारी असर पड़ा
02:092015 में JCPOA परमाणू समझोते के बाद कुछ राहत मिली
02:15लेकिन 2018 में अमेरिका के समझोते से बाहर निकलने और
02:19मैक्सिमम प्रेशर नित्ती लागू करने के बाद फिर से कई प्रतिबंध लागू करा दिये गए
02:262026 तक लगतार प्रतिबंधों, चेत्रिय संगर्षों और आंतरिक आर्थिक चुनोतियों
02:32इरान की अर्थववस्था को गंभीर संकट में पहुंचा दिया, इरान दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल है,
02:39लेकिन प्रतिबंधों की वजह से वो अपना तेल आसानी से अंतराष्ट्रिय बाजार में नहीं बेच पाता, कई देश तेल खरी�
03:00बाह कम हो जाता है और देश की अर्थववस्था पर दबाप पढ़ने लगता है, जब किसी देश के पास विदेशी
03:06मुद्रा कम आती है, तो उसकी स्थानिय मुद्रा कमजोर होने लगती है, यही इरान में भी हुआ, पिछले कुछ वर्षों
03:13में रियाल की कीमत लगतार गि
03:25थी, इसका मतलब यह है कि विदेश से आने वाली हर चीज, दवाईयां, मशीने, चिकत्सा उपकरण और कई जरूरी सामान,
03:34कई गुणा महंगे हो गए, महंगाई ने आम परिवारों की कमर तोड़ दी, विशो बैंक के अनुमान के अनुसार 2025
03:40-26 में इरान की जीजीपी में �
03:42लगभग 2.7 प्रतिशत संकुचन रहने का अनुमान है, फरवरी 2026 में वार्शिक महंगाई लगभग 62.2 प्रतिशत तक होच
03:52गई, जबकि खाद्य महंगाई करीब 99 प्रतिशत दर्ज की गई, रोटी, दूद, अंडे, चिकन, फल और सबजियों जैसे रोज मर्रा
04:01की चीज�
04:02लगतार बढ़ रही है, इसे में परिवार सबसे पहले अपने गैर जरूरी खर्च बंद करते हैं, बाहर खाना कम हो
04:09जाता है, इलाज टाल दिया जाता है, बच्चों की पढ़ाई पर खर्च घटा दिया जाता है, और लोग अपनी छोटी
04:16-छोटी पचत को डॉलर या सोने म
04:18बदलने की कोशिश करते हैं, दवायों और इलाज पर असर, हलाकि दवायों जैसी मानुय जरूरतों पर कुछ छूट दी जाती
04:26है, लेकिन बैंकिंग प्रतिबंधों की वजह से भुगतान और आयात दोनों प्रभावित होते हैं, कई अस्पतालों को आधुनिक मशीने और
04:35�
04:35जरूरी दवाई यां समय पर नहीं मिल पाती, कुछ मारीजों को जीवन रक्षक दवाईयों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता
04:42है, यानि प्रतिबंधों का असर सीधे स्वास्त विवस्था तक पहुँच चुका है, युवाओं के सामने रोजगार का संकट, इरान के
04:51विशे विशे विद्याले हर साल हजारों इंजीनियर डॉक्टर वैग्यानी को और आईटी विशे शक्य तयार करते हैं, लेकिन विदेशी निवेश
04:58की कमी और उड्योगों के सिमित विस्तार के कारण नई नौकरिया नहीं बन पा रही, यही वज़ा है कि बड़ी
05:05संख्या
05:06में युवा विदेश जाने की कोशुश करते हैं, इसे brain drain कहा जाता है, यानि की प्रतिभाशाली लोग अवसरू की
05:12तलाश में देश छोड़ देते हैं, इससे परिवारों और देश दोनों को नुकसान होता है, बिजली, पानी और इंटरनेट की
05:20चुनोतियां, महंगाई के स
05:21साथ-साथ बिजली कटोती भी आम लोगों की बहुत बड़ी समस्या बनते जा रही है, पुराने बिजली सयात्र, बढ़ती मांग
05:28और सिमित निवेश के कारण कई इलाकों में नियमित बिजली कटोती होती है, कुछ छेतर में पानी की कमी भी
05:35देखने को मिलती है, वही राश
05:50बहुत ब्रभावित हो जाते हैं, कि सारी जिम्मदारी सिर्फ प्रतिबंध होगी है, अब ये कहना पूरी तरह तो सही नहीं
05:56होगा कि इरान की हर आर्थिक समस्या का कारण केवल विदेशी प्रतिबंध है, कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आंत्रिक
06:02को प्रबंधन, �
06:03ब्रेश्टाचार, बजट घाटा, संसीटी व्यवस्था, मुद्रा नीती और सरकारी आर्थिक फैसलों ने भी इस संकट को गहरा किया है, यानि
06:12बाहरी प्रतिबंध और अंधरूनी कमजोरियां दोनों मिलकर आज की स्थिथी के लिए जिम्मदार है, जन्ता कबर्ता असंत
06:21जब रोज मर्रा के जिन्दिगी मुश्किल होती है, तो उसका सर्थ सड़कों पर भी दिखाई देता है, व्योहजर परचिस और
06:27दोहजर चबिस के दौरान व्यापारियों, दुकानदारों और आम नागरिकों के विरोध प्रदर्शन देखने को मिले, लोगों का सवाल जो
06:45नहीं सुने शिप कर सकता, फिर भी इरान पूरी तरह क्यों नहीं टूटा है, अब ये फिर भी का सवाल
06:52इसलिए आता है, क्योंकि देश के भीतर बहुत सारी परिशानिया चल रही हैं, दवाई का हो, रोजगार का हो, खाने
06:57पीने का हो, अर्थववस्था का हो, रियाल का हो
07:11इतने प्रतिबंधों के बावजुद इरान पूरी तरह आर्थिक रूप से ध्वस्थ नहीं हुआ, इसकी विचह है देश के विशाल तेल
07:18और गैस भंडार, बड़ा घरेलू बाजार, क्रशी उत्पादन और चीन, रूस समेद, कुछ छेतरिया देशों के साथ बढ़ता व
08:07आम नागरिकों तक पूरी तरह नहीं पहुँच पाता।
08:08को तो कमजोर किया, लेकिन आंतरिक आर्थिक नीतियों और संड़चनात्मक कमियों ने संकट को और गहरा बना दिया।
08:38आम नागरिक अपने बच्चों के भविश्यों को लेकर भरोसे के साथ जी सकें।
08:43क्योंकि किसी भी देश की असली ताकत, उसकी मिसाईलों, उसके तेल भंडार या सैन शक्ती से नहीं, बलकि उसके आम
08:50नागरिक के सम्माम जनक जीवन से मापू जाती है।
08:56अबस्टों को
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