00:00आज हम बहुत भागी शाली हैं, हमारे देश में एक ऐसा नित्रत्त है, हमारे देश के अंदर एक ऐसा बातावरण
00:08है, जहां पर हम अपने आपको सक्ति शाली बना सकते हैं, मानिय मोदी जी, मानिय मिश्या जी, सभी लोग इतने
00:18एक जुठ होकर काम करें, मुझे तो ग्रहमंत
00:29की जो कमिटमेंट देखी है, उनका जो विश्वाश देखा है, और उनकी जो दिर्टा देखी है, और क्लैर विजन, और
00:36कभी किसी हैं समझ उनको नहीं होता, वो बड़ी शुद्धा के पांतरे में कहता हूं, उन्होंने, हम तो हमारा तो
00:44लिमिटेट काम होता है, लेकिन जो
00:46उन्होंने देख के लिए क्या है, प्रधान अंतरी जीन ने देख के लिए क्या है, यह साथ इस देख को
00:51बहुत आगे बढ़ाएंगा, हमें इसी, उसको आगे बढ़ाने की कोशिच करेंचे देखें, एक बहुत बड़े हिंदी के कवी थे, कुछ
01:01लोगोंने यहां पर वो क�
01:16कुईता लिखी थी, मैं चाहता हूं कि हम सब लोग समय मिले, तो एक छोटी सी कवीता है, पंदरा सॉला
01:24बीस लेंगे, उसको पढ़ें तो, और उसको, उसका नाम है आग की भीख, उसमें उन्होंने कई बातें लिखी हैं, और
01:38अच्छी कवीता है, रोंग्टे हिला देने व
01:46सोचने का विशेदी था, और कभी जो है, इश्चर से प्रार्थना कर रहा है, भीघ मांग रहा है, वो इश्चर
01:54से वर्दान मांगने के लिए जाता है, तो कहता है, क्या चाहिए मुझे कि तम वेदनी किरन का संधान मांगता
02:03हूं?
02:04तम अंधिरे को कहते हैं
02:06जो तम को वेद सके
02:08जो अंधिरे से
02:10सिर्ण घुरू बुजे
02:12कहते हैं
02:13लोग उसको जिसको
02:13नाइड वीजिन जिसे दे सके
02:16तो तम वेद ने किरन का संचार मांगता हूं
02:20जड़ता विनाश्र को फिर
02:22भूचा लुआगता हूं
02:23ये जो जड़ भाव हैं
02:26जो कि आपको ध्रमित कर देते हैं
02:29आपको उन दिशाओं में ले जाते हैं
02:31कि आप अपनी देश की राश्ची की
02:34मानवता की समाती जो सही दिशा है
02:37उसको छोड़कर आप निजी इंटरस्ट की दिशाओं में चले जाते हैं
02:41आप सक्केरिन इंटस के जिशा में चले जाते हैं, विश्का सदा लहू में संचार मांगता हूँ, प्यारे सुदेश के हिद
02:52अंगार मांगता हूँ,
02:54तो दिनकर की वो जो ललकार थी, कि प्यारे सुदेश के हिद विश्का सदा लहू में संचार मांगता हूँ, तूफान
03:09मांगता हूँ, विस्फोर्ट मांगता हूँ, चर्थी जवानियों का शिंगार मांगता हूँ,
03:16आज का योवन है, आज का यूथ है, वो अपने आपको संवरित करें, पूलर रूप से ये सोचे, कि मैं
03:24राश्टे हित्म ही करूँगा, अगर मेरे छोटे मोटे इंटरस्ट हो भी, चाहे कुछ हो, उनको मैं नजर अंदास करूँगा, वो
03:31बात की बात है, अभी तो देश को
03:33बनाना है, ये वो समय है, जो हम गवा नहीं सकते, ये एक विंडो आफ अपर्चुनिटी, इस देश के इतियास
03:41में आई है, और मुझा आशा है, कि हम लोग इसको काम्याप से दोगे, और अपना एक नया इतियास बनाएंगे,
03:48बहुत बहुत धन्यवाद, जय हिंद, जय भा
03:51झाल
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