00:00विश्का सदा लहू में संशार मांगता हूँ गारे सुदेश के लिए उनके लिए ये खाता के और हमें उसका मुकाबला
00:16करूँ उसके लिए हमारे को एक दिर्टा के साथ संशे को हटा करूँ
00:22वो कि संशे आत्मा विनाशाया संशे में मत पढ़िये एक बार एकी चीज़ को सोचिए देश के इंटरस्ट को सोचिए
00:31देश के इंटरस्ट में काम करिए अपनी हर इसको आप आगे बढ़ाने के जिए अगर एक जिट होके चलें तो
00:38उतनी दूर भी नहीं है आज हम बहुत भ
00:52मानिया मोदी जी मानिया मिशा जी सभी लोग इतने एक जिट होकर काम करें मुझे तो ग्रहम इंतरी जी के
01:02साथ काफी क्लोजली काम करने का साभाग्य मिला है मैंने उनकी देश हित्किये प्रती जो कमिट्मेंट देखी है उनका जो
01:12विश्वास देखा है और उनकी जो दड�
01:22खैर हम तो हमारा तो एक लिमिटेट काम होता है लेकिन जो उन्होंने देश के लिए किया है प्रतान अंतरी
01:29जी ने देश के लिए किया है ये साथ इस देश को बहुत आगे बढ़ा है है मैंने इसी उसको
01:36आगे बढ़ाने की कोशिच करें चाहिए थे एक बहुत बड़े हिं
01:50सिंग दिन कर गुलामी के टाइम पर उन्होंने एक कविता लिखी थी मैं चाहता हूं कि हम सब लोग समय
02:00मिले तो एक छोटी सी कविता है पंदरा सौला बीस लेंगे उसको पढ़े हैं तो और उसको उसका नाम है
02:10आग की भीग
02:14उसमें उन्होंने कई बातें लिखी हैं और अच्छी कविता है ड्रोंग पे हिला देने वाली कविता है लेकिन उसमें कुछ
02:25सोचने का विशेदी था और कभी जो है इश्वर से प्रार्थना कर रहा है भीग माग रहा है
02:33वो इश्वर से वर्दान माहने के लिए जाता है
02:36तो कहता है क्या चाहिए मुझे
02:39कि तम वेदनी किरण का संधान मांगता हूँ
02:43तम अंधेरे को कहते हैं
02:46जो तम को वेद सके
02:48जो अंधेरे से true मुझे
02:51क्या किते हैं हम लोग उसको जिसको
02:54नए vision जिससे दे सके
02:56तम वेदनी किरण का संधान मांगता हूँ
03:00जड़ता विनाश्र को फिर भूचाल मांगता हूँ
03:03यह जो जड़ भाव है
03:05जो कि आपको ध्रमित कर देते हैं
03:09आपको उन दिशाओं में ले जाते हैं
03:11आप अपनी देश की राश्र की
03:14मानवता की समाद की
03:16जो सही दिशा है उसको छोड़कर
03:18आप निजी इंटरस्ट की दिशाओं में चले जाते हैं
03:21आप सक्टेरिन इंटरस्ट की दिशाओं में चले जाते हैं
03:26विश्का सदा लहू में
03:28संचार मांगता हूँ
03:30प्यारे सुदेश के हित
03:32अंगार मांगता हूँ
03:34तो दिनकर की वो जो ललकार थी
03:37कि प्यारे सुधिश के हिद
03:45विश्का सदा लहू मैं संचार वांगता हूँ
03:48तूफान मांगता हूँ
03:50विसफोट मांगता हूँ
03:51चर्टी जवानियों का शंगार मांगता हूँ
03:55यह आज का यूवन है आज का यूथ है
03:58वो अपने आपको समवरी पज्वेद करें
04:01पूले रूप से ये सोचे
04:03कि मैं राष्टे हित्म ही करूंगा
04:05अगर मेरे छोटे मोटे इंटरस्ट हो भी
04:07चाहे कुछ हो
04:08उनको मैं नजर अंदाज करूंगा
04:11वो बात की बात है
04:12अभी तो देश को बनाना है
04:14ये वो समय है जो हम गवा नहीं सकते
04:17ये एक विंडो आफ अपर्चुनिटी
04:19इस देश के इतियास में आई है
04:21और मुझा आशा है
04:22कि हम लोग इसको काम्याब से दोगे
04:26और अपना एक नया इतियास बनाएगे
04:28बहुत बहुत धेन्यवाद
04:29जय हिंद जय भारु
04:44कि हम लोगे भारु
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