00:00पूरे इतिहास में हमने यही दिखाया है कि पुरुष थन्यासी होना चाहता है, पुरुष सब कुछ त्याग करके बाहर निकलना
00:05चाहता है, पीछे से इस्तरी आगर के उसको ऐसे पकड़ लेती है, कभी याचना करती है, कभी अपना रूप यावन
00:11दिखाती है, कभी बच्च
00:33गुलामी जिसको ज्यादा मिली हुई है वही आजादी के लिए ज्यादा फड़ाएगा न तो गुलामी इसको ज्यादा मिली हुई है
00:39शरीर की समाज की धर्म की परंपरा की गुलामी इसको ज्यादा मिली हुई है तो आजादी के लिए भी ज्यादा
00:46फड़ाती है वो पहले ही �
00:48यह तैयार है कि भाईया यह सब हटाओ उड़ो बहार निकलो
00:54अभी भी मैं आप जितना देख पा रहा हूँ
00:56आधी तो होगी कम से कम महिलाएं कि नहीं होगी
00:58और अगर आधी मौजूद हैं तो इक्षा में अनुपायत दो और एक का होगा
01:02इस्त्रियों और पुरुषों का यहां मौजूद होने के लिए पुरुषों से दूनी इच्छा लगानी पड़ती है
01:08दूना प्रयास करना पड़ता और दूने बंधन तोड़ने पड़ते हैं
01:11तब वो यहां आकर एक और एक यहनुपाते मौजूद हो पाती है
01:17तो कौन कहता है कि महिला तो मोहिनी है कामिनी है
01:22उसका तो काम है पुरुष को अपनी माया में बांध लेना काला जादू कर देना
01:27उसको अपने रूप के जाल में फांस लेना और बिचारा पुरुष कबूतर की तरह गुटरगू कर रहा है किया दे
01:31मुझे तो
01:32फसा लिया फसा लिया
01:35इस बात पर फिर से विचार करिएगा
01:37बंधनों के जादा नुभग इसको होता है
01:38तिरी को ही होता है
01:40तो अगर मुक्ति दोगे तो लपक कर वही तो लेगी पहले
01:43और कौन लेगा
01:44इंसान की तरह देखो, दोस्त की तरह देखो
01:46मात बनेगी
Comments