00:00बहुत सारे बाबा और धरम गुरू जो सब हैं, वो आजकल सुनते वे पाए जाते हैं कि आप देसी दवाईयों
00:08का, जो हमारी पुरानी संस्कृति से रिलेटेड हैं, आई और वेदेख दवाईयों को रोचाहन दें, उनी की तरफ चलें, भुद
00:15को जरूरत पड़े तो देव
00:29या अंग्रेजी नहीं होती, दवाईय या तो दवाईय होती है या कच्रा होती है, जी, और उनकी उपर कोई, मतलब
00:37उनकी ऑथेंटिसिटी का कुछ पता नहीं, उनकी उपर कोई टेस्ट नहीं किये गए, कैसे करे जाएंगे, दवाईय की जगे स्वर्ग
00:45का अमरित घोशत क
00:51जी, दवाईय दवाईय होती है, शरीर संस्कृते नहीं जानता है, शरीर उपचार मांगता है, ये संस्कृतिक दवाईय क्या होती है,
01:00पारंपरिक दवाईय क्या होती है, दवाईय ऐसी चीज होती है जो या तो काम करेगी, या काम नहीं करेगी, और
01:06अंग्रेजी दवाईय
01:06माने क्या होता है दवाई या तो
01:08तार्किक होगी या वैग्यानिक होगी
01:11नहीं तो बोगस होगी दवाई की
01:13नेशनलिटी कबसे आने लग गई
01:14जर्मन मेडिसिन अंग्रेजी मेडिसिन
01:16ये क्या बाते हैं इनका कोई अर्थ है
01:19आप शरीर को बताओगे
01:21कि देख फ़लानी दवाई थे तू जरूर ठीक हो जाना क्योंकि वो हमारी
01:24कल्चरल मेडिसिन है शरीर नहीं मानेगा भाई शरीर कहेगा मुझे लो
01:29डाइगनोज करो वेर इस साइंटिफिक एकुपमेंट रिपोर्ट चाहिए हाब उस पर अगर
01:35आयरुएदिक दवाई काम करती है तो बेशक उसको ग्रहन करो सम्मान दो
01:40मैंने खुद आयरुएदिक दवाईयां ली हुई है जीवन में एक समय पर
01:44और कुछ हत्ता कुनोंने काम करा भी था बहुत अच्छी बात है लेकिन ये कह देना कि
01:50एक तरह की दवाई अच्छी है एक तरह की दवाई अच्छी नहीं क्या बाते हो रही है कैसी बाते हैं
01:55ये
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