00:00एक सूफी फकीर की कहानी जलती है
00:03उसने कहा कि ये सब कुछ तो उपर वाले का अल्ला का है
00:07तो मैं इसको क्यों सुईकार करूँ
00:08तो फकीर था वो बस एक इतना ऐसे पेटोरा लेके घुमता था
00:13कहता था इसी ये मेरा सब हो जाएगा
00:14कोई खाने को दे उसमें डाल ले पानियों उसी में डाल ले और अपना
00:18कुछ कपड़ा उसने पहन रखा है पस इसके लावा कुछ नहीं
00:22कियाते मरा तो फरिश्टा आया उसके पास
00:26कहानी है समझ ना मरने के बाद तो किसी के पास क्या आएगा कोई
00:29पर बोध कता की तरह समझो
00:32तो मरने के बाद
00:34फकीर
00:35बड़े उत्साह में उतावला
00:38आत्म विश्वास की जीवन भर साधना करिये
00:43कभी कुछ भी
00:44अपनाया नहीं
00:50जल्दी मुझे ये ले चलेगा
00:52स्वर्क की और जन्नत
00:55फरिष्टा बोलता है
00:56वो कटोरा काई के लिए
01:00तो बुलता है कि लोगों के पास
01:02बड़े बड़ी सल्तनत होती है
01:04तुम उन से नहीं पूछते
01:06मेरे पास कुल ये
01:07एक कपड़ा इतना सा और एक कटोरा
01:09तो तुम इस पर मुझे दोशी बता रहे हो कटोरा किसली है
01:22बुल रहे तुम्हारा दोशी ये नहीं कि तुम्हारे पास कटोरा है
01:27तुम्हारा दोशी ये कि तुम्हें लगा जन्नत कटोरे बाजी से मिलती है
01:34जन्नत का इससे क्या जन्नत मने आप
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