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यह वीडियो 09.04.2026 को आयोजित "वेदांत संहिता" सत्र से लिया गया है।

वीडियो जानकारी : 09.04.2026, वेदांत संहिता सत्र

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Transcript
00:00एक बड़ा सुंदर गाना है
00:03स्कूल के दिनों से मुझे अच्छा लगता था
00:06उतना सपश्ट अब नहीं होता था कि इसमें क्या बात है जो लगता है
00:09पर कुछ बात थी जो
00:12सुनिएगा उसका
00:14ओरिजिनल में जा करके
00:16बोल ऐसे हैं कि हम सफर मेरे हम सफर
00:20पंक तुम परवाज हम
00:23जिन्दगी का गीत हो तुम
00:25गीत का तुनहीं नहीं है
00:30तम्मा तम्मा लोगे सुनोगे तो
00:37ये स्वस्थम बंद है
00:39परवाज मने उडान
00:42हमारा तुमारा रिष्टा पंक और उडान का है
00:45पिंजडे और क्याद का रिष्टा नहीं है हमारा तुमारा
00:49इसी नहीं भी नहीं सुनाई है
00:52ओ इतने कम हाथ
00:55वो भी दादा तर बस फुड़ा सब पीछे वाली पीड़ी के
00:59अच्छा इसे अच्छे से गाएगा कौन? किसको इसका सो रहाद? आप गाएंगी?
01:16मेरी आवाज अच्छी नहीं है
01:19हम सफर मेरे हम सफर
01:25पंख तुम परवाज
01:29हम जिन्दगी का साज हो तुम
01:35साज की आवाज हम
01:39तेंक यू
01:45यह सुन्दर्ता अध्यात्म की है
01:47अध्यात रूखा नहीं होता
01:50सबसे प्यारे गीत उठते हैं अध्यात से
01:55इस ब्रह्मे मत्राज आईएगा
01:57कि ज्यान मार्ग तो शुष्क होता है
02:01यह जो गीत है न यह ज्यान मार्गियों का है
02:05अश्टावक्र की गीता
02:07ज्यान मार्ग का बड़ा उंचा ग्रंथ कही गई है
02:11पर नाम उसको गीत ही दिया गया है
02:15अश्टावक्र गीता
02:17गीत भी तो विशय ही है ना
02:21तो जो विशय आपको उठा दे वो सुन्दर
02:24और यह बात ग्यान की है
02:28ग्यान माने क्या होता है कुछ इक अठ्ठा कर लेना नहीं
02:30जो इक अठ्ठा कर रखा है उसका मिठना
02:33ग्यानी वो जिसका ग्यान कम से कम होता जा रहा है
02:37बात आ रही है समझ में
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