00:00आपका क्या उपीनिन है जो कुछ जातियों को एडमिशन और नौकरी में रेजिवेशन मिलता है?
00:04अगर एक्जाम सेम है पेपर सेम है तन वाइशुद दे रूल्स भी डिफरेंट?
00:08अट दे अट अफ दे अफ दे डे मेरिट शुद माटर राइट?
00:09ब्रो परसनली मुझे लगता है कि सिस्टम को अपडेट करने की नीड है
00:12इकोल ऑपरचुनिटीज मिलनी चाहिए सबको बट फाइनल सेलेक्शन शुद डिपेंड अन मेरिट
00:16परना कॉम्पिटिशन का पॉइंट ही क्या है?
00:17इमानदारी की बात तो यह है कि मैं मानना पड़ेगा कि अन्याय तो हुआ है
00:21अन्याय मात्र नहीं हुआ है
00:23उस अन्याय से जो उचे वर्ण रहे हैं उन्हें फाइदा भी हुआ है
00:29नहीं मानना चाहते हैं लोग कि अन्याय अत्याचार हुआ है
00:32लोग कहते हैं ऐसा कुछ हुआ नहीं था कभी
00:34न तो इतिहास पढ़ रहे
00:36न आकड़ों पर जा रहे
00:38न तथ्यों पर जा रहे
00:39अरे इतिहास की नहीं सुननी
00:40तो आज अलग अलग जातिगत वर्गों
00:43का जो स्टेंडर ओफ लिविंग है वही देख लो
00:46नायम का एजुकेशनल स्टेंडर देख लो
00:48सब कुछ जो जो उनको
00:50सोशल अमेनिटीज मिल सकती है
00:52वो देख लो कुछ नहीं सुनना चाहते
00:54नीतियां बनाना
00:55एक तरह का समाधान है पर वही गहरा
00:58समाधान नहीं है वरना आप क्या करोगे
01:00कि जो नीतिनिर्धारक हैं
01:01आप उनको ही सरकार से हटा दोगे
01:04लोगतंत्र है तो वोट से हटा दोगे
01:06लोगतंत्र नहीं है तो बंदूख से हटा दोगे
01:09कोई बहुत अच्छा समविधान है तो आप बोल दोगे
01:11नहीं हमें समविधान ही नहीं चाहिए
01:12constitution amendment कर दो ये कर दो वो कर दो
01:14नया सम्विधान ले आदो
01:15आप ये सब करना शुरू कर दोगे
01:17आखरी बात तो ये ये कि आपके
01:20भीतर जो शोशन और
01:21भेदभाव का जन्मगत
01:24बीज होता है उसको
01:26ही निकाल फेका जाए और
01:27उसके लिए होता है अध्यात में
01:29उसके लिए दर्शन होता है उसके लिए विदान्त है
01:32उसके लिए बहुत धर्म है
01:33उसके लिए भगवत गीता है
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