00:00आचारे पिर्शान को मिली जान से मानने की धमकी
00:03सच बोलोगों तो समाज को वो पसंद नहीं है
00:06मैं आपसे सच के खतरे उठाने को कह रहा हूँ
00:10वो भी सरेयाम
00:11बाजार में, समाज में, व्यापार में, घर में
00:15आप सच के खतरे उठाने को तैयार हैं?
00:20फस गया हो
00:30इज़त के खिलाड़ी हैं हमें से ज्यादा तरलोग, करो वो काम जिससे इज़त पाते हो वो रूठ जाएंगे, सच्ची जिन्दगी
00:37जी करके इज़त कमाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि सच्ची जिन्दगी को इज़त भी सच्चा ही आदमी देगा और सच्चा आदमी
00:44तो क
00:44कोई, इंसान हो तो बेधळक सामने आओ, चुनोती दो अपने बंधनों को, और हिम्मत दिखाओ कि प्रेम को प्रवेश दे
00:52पाओ, और सर जुकाना सीखो सच के सामने, और तन के खड़े रहना सीखो जूठ के सामने, तक परीक्षा होगी
01:00कि कितना अध्यात्न है
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