00:00क्या करोगे दवाई घर में रख करके अगर उस दवाई का अपनी बीमारी से कोई रिष्टा ही नहीं बना रहे
00:06तो जब डॉक्टर आपको पर्चा लिखते हैं तो सीथे दवाई नहीं लिख देते पहले उपर क्या लिखते हैं पहले आपका
00:15नाम पता सब लिखा जाता है उमर
00:30अब सुचो कुछ पता ही नहीं कि मैं कौन बीमारी क्या लक्षण क्या कुछ पता ही नहीं और दवा भर
00:38है जिसे कोई फार्मेसी की दवा की दुकान हो और उसमें 700 अलग तरह की दवाई रखी हूँ ऐसे हमारे
00:45सामने गीता रखी होती है साथ सोचलो अलग अलग तरीके की अ
00:51अलग अलग मर्जों की दवाई रखी हुई हैं सब बढ़ियां हैं बस एक छोटी थी बात नहीं पता है क्या
00:58बीमारी क्या है अपनी बीमारी पता नहीं तो गीता के श्लोकों का आप से रिष्टा क्या बनेगा
01:10अध्यात्म का अर्थ होता है प्रकाश का अंधकार से रिष्टा बना देना तमसो मा ज्योतेर गमया यह रिष्टा है अब
01:21ज्योती ज्योती ज्योती ज्योती ज्योती पूरी जिंदगी में ज्योती ज्योती और अपनी तमस का कुछ पता नहीं अपनी तमसा से
01:29कोई साक्षात
01:30कार नहीं और दिन भर जोती जोती जोती उससे क्या हो जाएगा रिष्टा तो बने नहीं
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