00:00एक बात भूली जाते हैं हम, कुछ भी सुधारना नहीं होता, जो बिगालने वाला होता है उसको रोकना होता, सुधार
00:10अपने आप में कोई नया कर्म नहीं होता, सुधार बस पिछले कर्म के केंद्र की शुद्धि का नाम है,
00:23जिस केंद्र से तुम आज तक कर्म करते आए हो, अपने पूरे पिछले समय में, उस केंद्र से काम करना
00:32बंद कर दो, सुधार तो होई जाय कोई, सुधार नहीं जरूर थोड़ी है, प्रहमान्द अपने आप में बहुत सुधारी हुई
00:38जगह है, मनुष्य की ही दुनिया बि�
00:53स्वस्था कोई सुधार की जरूरत क्यों पड़ती है, क्योंकि मनुष्य अपने सारे काम, अपनी सारी चाल गलत केंद्र से चलता
01:02आया है, उस केंद्र को बदले बिना चाल की दिशा बदलने से इस्थिति और खराब ही होगी सुधरेगी नहीं
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