00:00विवस्था को दोश देने वाले हम और अभी पढ़ रहा था कि भारतिये रेल से करोडों रुपए के जानते हो
00:09क्या चोरी हुए कंबल और तकिये ये क्रामती करेंगे
00:17कंबल और तकिये चुराने वाले ये कह रहे चलो
00:24पेपर लीग होते हैं बिलकुल होते हैं एक बात बताना पेपर लीग के खिलाफ वो भी आक्रोश जताते हैं क्या
00:34जिन्होंने वो लीग पेपर खरीदा था
00:39वो भी आके कहते हैं विवस्था मुर्दाबाद है विवस्था मुर्दाबद वो भी कह रहे हैं क्या
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