00:00शीवलिंग पर दूद चड़ाना बहुत ज़रूरी है
00:02आई के हमारे गुरू जी ने बताया है कि वो जो दूद का फैट होता है
00:05वो शीवलिंग के पत्थर को चटकने से रोकता है
00:08तुम दूद का इस्तिमाल मॉस्चाराइजर की तरह कर रहे हो
00:10आगल पना रहे हो किसको
00:12कि जब प्रथा शुरू हुई थी
00:13क्रिशक समाज था सब
00:15खेती गरते हैं
00:16खेती में जो पूरा गौवणश है उसका इस्तिमाल होता है
00:21तो उस समय जो उची से उची चीज थी आपके पास हो थी दूद
00:24तो उस समय के लोगों ने इस भाव के साथ दूद हर्पित करना शुरू गिया
00:28कि साब हमारे पास सबसे मूलेवान वस्तो यही है
00:31तो यह वहां से प्रथा रही है
00:32फिर उसी क्रम में यह भी प्रथा बनी
00:34कि मंदिरों में सोने चांदी का भी चड़ावा चड़ने लगा
00:37भाव फिर वही था कि तुम्हारे पास जो मूलेवान है
00:40वो तुम प्रमात्मा को समरपित करो
00:42जब दूद लगता था कि हमआरे पास मूलेवान है
00:44दूद कर देते थे दूद से आगे बड़े तो सोना चान्दी करने लगे तुम आज भी दूद चढ़ा रहे हो
00:48और फिर इस तरह के घटिया तर्ग दे रहे हो कि दूद डालने से पत्थर चटकता नहीं है