00:00भारत की मौझूज़ा जो हालात है वो युद्ध के हालात है उसको लेकर आप भारत कहा देखते हैं?
00:04युद्ध मात्र शस्त्र से नहीं लड़े जाते अर्जुन के पास क्या गांडीव नहीं था
00:10क्या क्षमत्य की कमी थी, क्या अभ्यास की कमी थी, सरुशेष्ट धनुर्धर थे
00:14लेकिन मैंने कहा जीतना तो छोड़ो लड़ते भी नहीं
00:17शस्त्र से पहले शास्त्र आता है
00:19तो ये जो दुनिया भर में तरह तरह के संगर्षों और युद्धों का माहौल है
00:24इसमें भारत को शास्त्र चाहिए
00:26अब शास्त्र तो आप पहνεगे कि भारत के पात सजारों वर्षों से हैं
00:30शास्त्र रहे हैं
00:31पर पहली बात जन जन तक नहीं पहुँचे और दूसरी बात
00:34उनका जो अर्थ जन साधारण तक पहुंचा है वो अक्सर विक्रत रहा है
00:39तो हमारा दोतरफा अभियान है
00:41पहला सब तक उच्यतम धर्म दंथों को पहुंचाया जाए
00:45और दूसरी बात उनके मौलिक और शुद्ध रूप में पहुंचाया जाए
00:49अगर ये बात हो गई तो फिर भारत अपराजय हो जाएगा
00:54जो गीता जानता है
00:56मैं कहा करता हूँ कि किसी भी तरह का युद्ध हो
00:59उसकी मृत्य तो आ सकती उसकी हार नहीं हो सकती
01:02क्योंकि हार तो तब होती है जब आपने किसी विशेश परणाम की आशा करी हो
01:07वो परणाम मिला नहीं तो आपने भुटने टेक दिये समर्पन कर दिया
01:10जिसने जान लिया कि जीवन किस लिए है और किस काम में बिताना है किस युद्ध में जोकना है
01:15वो अभार नहीं सकता भारत को अपराजय है तो उसके शास्त्र ही बनाएंगे
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