00:00गाने जंगलों और वीरान रास्तों के बीच खड़ा था एक पुराना पुल, लोग उसे भूतिया पुल कहते थे, लेकिन इन
00:05बातों से अंजान, आरव अपनी मोटर साइकल पर उसी रास्ते से जा रहा था, सड़क वीरान थी, उसकी बाइक की
00:12हेडलाइट धुंद को चीरती ह
00:13आगे बढ़ रही थी, अचानक, जैसे किसी ने उसके कान के पास फुस-फुसाया हो, रुको, आरव चोंका, उसने बाइक
00:20रोकी और पीछे मुड़ा, चारों तरफ अंधेरा और पेड़ों की सरसरा हट के अलावा कुछ नहीं था, घबरा कर उसने
00:25बाइक दोबारा स्टार्
00:28दे दिया, ठीक उसी वक्त, उसे पुल पर एक और दिखाई दी लाल साडी में लिप्टी हुई, वो धी मेधी
00:34में उसकी तरफ बढ़ी, और बेहत थंडी आवाज में बोली, तुम्हें यहां, इस पुल पर नहीं होना चाहिए, आरव का
00:40गला सूख गया, वो चीखते हुए �
00:42भागने लगा, अचानक उसके कानों में बच्चे की चीख गुंजू थी, आरव उस रात के बाद से कभी नहीं मिला,
00:49अगले दिन सिर्फ उसकी मोटर साइकल पुल पर खड़ी मिली, कहते हैं, ये वही औरत थी जिसका बच्चा इस पुल
00:54के निर्मान के समय बली चड़ा दि
01:00और आज भी जो भी उस पुल पर रात में जाता है, वो फिर कभी वापस नहीं लोटता,
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