00:00गुस्से और हताशा में डूबा राघव, उसी रात बाबा के पास जा पहुंचा, बाबा ने आँखें खोली और भारी आवाज
00:06में बोला, बेटा, वशीकरन खेल नहीं है, ये दिल जीतने की विद्या नहीं, बलकि किसी की आत्मा को बांधने की
00:12जंजीर है, इसका फल करवा ह
00:15होता है, लेकिन राघव ने जिद्धान ली थी, आखिरकार बाबा ने उसे एक लाल धागा दिया और कहा, इसे माया
00:20को छूकर अपनी कलाई में बांध लेना, फिर देखना, राघव ने वैसा ही किया, कुछ दिनों में माया का व्यभार
00:26पूरी तरह बदल गया, वो खुद �
00:28राघव के पास आने लगी, क्लास छोड़ कर उससे मिलने लगी, रात रात भर कॉल करने लगी, राघव को लगा
00:34उसकी इच्छा पूरी हो गई, लेकिन धीरे धीरे माया का चेहरा पीला पढ़ने लगा, होस्टल में लड़कियां कहती ही, कि
00:39माया नींद में चीखती है, और
00:58और तेरे जीवन में भी विनाश होगा, राघव की रूह कांप उठी, तो अब क्या करूं बाबा? बाबा ने उसे
01:04एक दीपक और गंगा जल दिया और आदेश दिया, आज आधी रात को शहर की सीमा पर पुराने पीपल के
01:09पेड़ के नीचे इस धागे को जला कर उसकी रा�
01:25आत्मा को नोच रहा हो, अगली सुबह माया फिर से सामान्य हो गई, उसे कुछ भी याद नहीं था, लेकिन
01:31राघव की कलाई पर अब भी जलने का गहरा निशान मौजूद था, हमेशा याद दिलाने के लिए कि सच्चा प्यार
01:37कभी जबरदस्ती नहीं होता
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