00:00शहर के पुराने पुलिस इस्टेशन की इमारत अब लगभग वीरान हो चुकी थी,
00:04लेकिन उसके अंदर बना एक छोटा सा लॉक अप नमबर तीन आज भी इस्तिमाल नहीं किया जाता था।
00:10कहते हैं, रात के ठीक दो बजे उस लॉक अप से जंजीरों के खड़कने,
00:14किसी के कराहने और धीमी फुसफुसाहट की आवाजें आने लगती हैं।
00:19एक दिन नए सब इंस्पेक्टर अरजुन की पोस्टिंग वहां हुई,
00:22उसने इन बातों को महज अफवाह समझकर नजर अंदाज कर दिया।
00:26उसी रात उसने तय किया कि वो खुद लॉक अप नंबर तीन की सच्चाई देखेगा।
00:31जैसे ही घड़ी ने दो बजाए, पूरे स्टेशन में अचानक सन्नाटा चागया।
00:36और फिर धीरे धीरे वही आवाजें शुरू हुई।
00:39जंजीरों की घिसट, किसी के रोने की धीमी आवाज, अरजुन ने टॉर्च उठाई और लॉक अप के पास पहुँचा।
00:46दर्वाजा बंद था, ताला लगा हुआ, लेकिन अंदर से किसी के चलने की साफा आवाज आ रही थी।
00:52हिम्मत करके उसने ताला खोला, अंदर अंधेरा था, लेकिन जैसे ही टॉर्च की रोशनी फैली, दीवारों पर खून से बने
01:00पुराने निशान दिखने लगे, अचानक उसे लगा, जैसे पीछे से किसी ने फुस-फुसा कर कहा, हमें बाहर निकालो।
01:08अरजुन ने पलट कर देखा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
01:38हमेशा के लिए सील कर दिया गया, लेकिन कहते हैं, आज भी रात के दो बजे वहाँ से वहीं आवाजें
01:44आती हैं।
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