00:00Mumbai के कोलाबा इलाके में समुदर के किनारे खड़ी मुकेश मिल्स कभी एक चलती फिरती कपड़ा मिल हुआ करती थी
00:05लेकिन 1980 के दशक में लगी भीशन आग ने पूरी इमारत को खंडहर में बदल दिया
00:10और उसके बाद यह जगह फिल्मों की शूटिंग के लिए इस्तिमाल होने लगी
00:15शुरुआत में सब सामान्य था क्योंकि टूटी दीवारें और जली हुई संरचना फिल्मों के लिए परफेक्ट लोकेशन मानी जाती थी
00:21मगर धीरे धीरे फिल्म यूनिट्स के बीच एक अजीब चीजे नोटिस होने लगी
00:26जैसे ही शाम ढलती सेट पर माहौल बदल जाता
00:29हवा अचानक भारी महसूस होने लगती और कई बार बिना वजह शूट रोकना पड़ता
00:34क्योंकि उपकरण ठीक होने के बावजूद काम नहीं करते थे
00:37एक मशहूर घटना तब हुई जब एक फिल्म की रात की शूटिंग के दौरान
00:41मुख्य हीरोईन अचानक स्क्रिप्ट भूल कर अजीब तरीके से व्यवहार करने लगी
00:46और बार बार सेट के एक खाली कोने की तरफ देखकर डायलॉग बोलने लगी
00:50जबकि वहाँ कोई मौजूद नहीं था शूट रोकना पड़ा
00:53और अगले दिन पूरी यूनिट ने रात में काम करने से मना कर दिया
00:56इसके बाद अलग-अलग फिल्मों की टीमों ने लगभग एक जैसी बातें बताई
01:00शाम के बाद असहज माहौल, अचानक सननाटा
01:04और ऐसा एहसास जैसे कोई अंदेखा दर्शक शूटिंग को देख रहा हो
01:08आज भी कई डायरेक्टर वहां दिन में शूट करते हैं
01:11मगर अंधेरा होने से पहले सेट खाली कर दिया जाता है
01:14क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री में एक पुरानी बात अब भी कही जाती है
01:17कुछ लोकेशन कैमरे के लिए बनती है
01:19और कुछ जगहें सिर्फ देखने के लिए
01:21जहां कहानी खत्म होने के बाद भी कोई सेट छोड़ कर नहीं जाता
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