00:00अचार जी मेरा प्रेशन अधिकांश्त यह रहता है कि जैसे आप बोलते हैं कि सही संपती ही सब कुछ है
00:04तो मैं एक डैलेमा में फ़र जाता हूं
00:06अगर सही व्यक्ते को चुनाएं तो वो खुदी कभी अनुमते नहीं देगा तुम्हें आश्रित होने की अपने होपा की
00:17अगर आश्रित होने की बात है तो मामला कभी एक तरफ नहीं होता कि तुम आश्रित हो गए उधर से
00:24भी तो अनुमते आनी चाहिए तुम चाहते हो कि कंधे पर सरचर रो जिसका कंधा है वो अनुमती देगा तब
00:32भी तो रोगे तो अगर सही व्यक्ते चुना है तो वो खु�
00:46मैंने माथमेटिक्स को चुना था तो अब मैं लगता हूं कि कश्मर कश है जिस चीज में हो अगर उसकी
00:54भात्ता समझते हो और फिर वो चीज तोड़ रही है तो अच्छा ही तो कर रही है कोई भी अच्छा
01:06काम होता ही इसलिए कि मैं अच्छे से तोड़ देगा इतना नहीं
01:12अच्छे नहीं है कि मतलब मैं इस इंट्लेक्स की नहीं है बात तो इगो की है जो कि अपनी सीमाओं
01:27से आगे जाना नहीं चाहते अपने बंदनों में बंदा रहना चाहता है अ फिर आप से और फ्वील्ड में चले
01:33जाओगे वह यहां पत्रों करें तो मैं अभी सबसे अच्
01:43इनकेपिबल ही निकले कि ब्रेन के पास ही उक्षमता नहीं है जो आप प्रॉसेस कर पाओ फिर भी आप रुखें
01:50तो समझ में आएगा अभी प्रॉब्लम आपके इंफ्रस्रक्चर की नहीं है अभी प्रॉब्लम डिसीजिजन में कर आप चले जाओगे आर्ट्स
02:00में हिस्ट
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