00:00अच्छा जी मेरा प्रश्ण है कि मैंने जहां से शुरू किया था अपनी जर्णी को मैं आज ने आपको वहीं देख रही हूँ और मुझे बहुत सहरा डर आत्म विश्वास जो है मेरा खो चुका है
00:11मुझे लगता है कि मुझे कुछ भी नहीं होगा मैं आप क्या गरूँ आपने सब खो दिया होता तो यह संशे किसको होता और यह डर किसको लगता और इतने विश्वास के साथ यह कौन कह सकता कि मुझे में आत्म विश्वास नहीं है आपने सब खो दिया होता तो आपने यह स
00:41कहां खोया, हाँ यह जरूर हो रहा होगा शायद कि जो डिजायर्स रही होंगी पहले
00:47वो अब पूरी होती शायद ना दिखाई दे रही हो
00:51या उन डिजायर्स कि में कुछ खॉलनेस देखने लगी हो
00:57कि वो इस लायगी नहीं है कि मैं उनका पीछा गरूं, परसिव गरूं
01:00वो हो सकता है, लेकिन देखो इगो ऐसी चीज नहीं होती जो सब कुछ खोदेगा भी
01:08उसकी हैसियत ही नहीं है सब कुछ होने की क्योंकि अगर इगो है
01:14तो वो कुछ ना कुछ पहुत कुछ तो वो पकड़कर रखेगी ही रखेगी हाँ इतना जरूर है कि पहले जो पकड़ रखा था अब हो सकता उससे कोई अलग विशय पकड़ ले कोई दूसरा अबजेक्ट पकड़ ले अगर तूट गई होती तो इतना दुख भी नहीं होता �
01:44से भरोसा भी क्यों कर रही हो और जितनी हिम्मत के साथ जितनी दुड़ता के साथ यह भरोसा कर रही हो वो सकता है उतनी हिम्मत उतनी दुड़ता से कुछ और भी हो जाए तो जो भीतर बैठ करके यह सब पका रहा होता है ना उससे दो-चार सवाल पूछा करो एतना कॉन्�
02:14इतना confidence कहां से आता है
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