00:21दॉक्टर साइब, आप बिल्कुल ठीक वक्त पर आई हैं
00:23ना जाने ये लोग यहां क्यों खड़ें, कुछ भी बालू बाद नहीं है
00:26मैं पूछना ये चार तक के आखर मैं अपनी बेटी से कब मिल सकता हूँ
00:31एचली अराम कर रही है वो भी, आपकी बेटी जहनी दबाओ को शिकार है
00:36तो इसलिए हमने नीम की दबाई दी है, ताकि उनका जहनी दबाओ कम हो जाए
00:40और तब ये समल जाए उनकी
00:41मेरे ख्याल से वो चार पाँच घंटों में बिलकुल ठीक हो जाएगी उसके बाद आप उनसे मिल सकते हैं
00:46ये तो अच्छी बात है
00:48मगर डॉक्टर, हम साहभा को घर कब ले जा सकते हैं?
00:52अच्छा घर, बहुत जल्द, जानी कुछ देर बाद
00:55मैं ये सब क्या कह रही हूँ यार
00:57तो आप लोग समझ गए होंगे
00:59साहभा को हमने नीन की दवाई दी है, जिसकी वज़ा से सो रही है वो
01:04ऐसा हमने क्यों कि ऐससे पहले आप पूछे, मैं आपको खुद बता देती हूँ
01:08मरीज की मुकमल सहत्याबी के लिए अराम बहुत जरूरी है
01:10इसलिए नीन की दवाई देनी पड़ती है
01:12और मेरा मश्वाय ये है कि आप लोग भी जाकर अराम करें
01:15ताके आप लोगों का स्ट्रेस भी कम हो जाओ और आप लोग पहतर फिल करें
01:17इस तरह बॉड्र और माइंड दोनों कंट्रोल में रहते हैं
01:20समझ गए होंगे, आप मेरी बात अच्छी तरह से समझ गए होंगे
01:25लेकिन वो आप कहरें नीन की दवाएं, आखिर क्यों दिये आपने उसको ये
01:29बाबा के ये जूट तो नहीं बोल रहे हैं उसे
01:31नहीं भाई नहीं, मैं जूट क्यों बोलूँगी तुम लोगों से आखिर हां बताएं
01:34मेरे कहने का मतलब ये था कि इनसान के लिए अराम बहुत जरूरी होता है
01:37इससे इनसान का दिलो दिमाग बिल्कुल फ्रेश रहता है
01:39और मैंने आपको ये मश्रा इसलिए दिया ताके आप जिस स्ट्रेस में है वो कम हो जाए
01:43और आपको दिलो दिमाग एनर्जेटिक फिल करें
01:45लेकिन फिर भी आप लोग कह रहे हैं कि मैं जूट कह रही हूँ
01:47यकीन करें मैं सच कह रही हूँ
01:49ठीक है डॉक्टर लेकिन मैं आपसे एक बात पूछना चाहता हूँ
01:52क्या मेरी बेड़ी को किसी चीज़ से कोई खत्रा है
01:54कोई परिशानी की बात तो नहीं न
01:58हलो डॉक्टर मैं आपसे बात कर रहा हूँ
02:01डॉक्टर बाबा कुछ पूछ रहा है आपसे ने जवाब दीजिए प्लीज
02:04एक्स्क्यूज में मैं जरा एक नुट में आती हूँ
02:07लेकिन ये कहां चाह रही है चाहनक से
02:27अले रुको कहा मेरी बेड़ी को खवागर के लिए चाहरे हो तुम
02:31सितना नहीं छोड़ूगा चाहन से मार दूगा मैं तुम्ह
02:32रुक जाएए तुम बेड़ी बेड़ी कोखवा कर रहे थे हिम्मत कैसे ही तुम्हारी ये करने की
02:37जोड़े बाबा ये क्या चल जाए सब हाँ तुम चालते भी हो कौन हूँ मैं माल दूगा तुम्हें साहबा से
02:43अलग किया तुम्हुद को माल लूँगा
02:44महबब करता हूँ मैं इससे जमाल ये तुम क्या कर रहे हो मैं दुम्हारे बगres
03:14मेस्टर रमीज, देखें, बात सुने मेरी, यह दोने एक दूसरे से प्यार करते हैं, और मैने अलग नहीं होने दूँगी,
03:19बहतर होगा डॉक्टर साइबा कि आप यहां से चली जाए, नियाना पागिल मत बरू, मैं कहता हूं, चलो यहां से,
03:23मैं बात करियू, समझ नहीं आरी
03:40सोच रहे हैं, उसी ने आपकी बेटी पर गन तानी हुई है, यह क्या कर रहे हो, तुम जाहिल इंसान,
03:45गन नीचे करो, मारोगे क्या इसे, यह किसी और के साथ भाग कि हमारी इजद में बात करो तुम लगा,
03:51क्या एक और पर गन तान कर मर्दानवी का सबूत दे रहे हो, मग
04:09मुझे क्या मालूम होगा कि कितनी बार चाय बीती, इसका जब दर जाय बना के पिये को इसको रोक टोक
04:13थोरी है, या मैं मना करूंगा, हाँ, वैसे तो तुम जैसे मर्द खवतीन का आलमी दिन बड़े जोश खरोश से
04:18मनाते हैं, तो बेता रुका कि खवतीन की इजद भी कर
04:35है और आप कुछ नहीं कह रहे है, और दूसरी तरफ चमाल है जो आपकी बेटी के लिए जान दे
04:39रहा है वो, इनकी तरफदारी इसलिए कर रही हूँ मैं, क्योंकि इनके दर्मियान महपत एखी है मैंने, ये तो ये
04:47भी जानता है कि आपकी बेटी काफी कैसी पीती है, काफी
05:06दफ़ जाओ मेरे साथ से, बापा, बापा कहने की साथ दिया मुझे, दफ़ जाओ यहां से, दफ़ जाओ, साइबा, यहो
05:19मेरी बच्ची, बापा,
05:35कि अपस्तु जाओ, यहो मेरी यहां से, बापाङ जाम् देसी फस्तित्युत्यूं?
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