सवाईमाधोपुर.राज्य सरकार की ओर से शहरवासियाें को राहत देने के लिए भले ही इन दिनों शहरी सेवा शिविर चलाया जा रहा हो। मगर नगरपरिषद में यह शिविर केवल कागजी खानापूर्ति ही साबित हो रहे है। पट्टा वितरण समेत कई प्रमुख कार्यों में अब भी नगरपरिषद पूरी तरह से फेल है। कुछेक लोगों को पट्टा वितरित कर जिला प्रशासन व नगरपरिषद की ओर से वाही-वाही लूटी जा रही है लेकिन असल में वास्तविक लोग आज भी केवल चक्कर ही काट रहे है।
राज्य सरकार ने शहरवासियों को राहत देने के लिए 12 जून से शहरी सेवा शिविर शुरू किए है। यह शिविर इन दिनों नगर परिषद के पार्क में आयोजित किए जा रहे है। इनका मकसद था कि नागरिकों को एक ही छत के नीचे पट्टा वितरण, भवन निर्माण स्वीकृति, सीवरेज कनेक्शन, रोडलाइट सुधार और ठोस कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाएं मिल सकें। लेकिन नगरपरिषद में चल रहे ये शिविर जनता के लिए निराशा का प्रतीक बन गए हैं। कुछेक पट्टे बांटकर प्रशासन व नगरपरिषद वाहवाही लूट रहा है, जबकि असल लाभार्थी अब भी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। राहत का वादा किया था, लेकिन हकीकत में यह शिविर केवल कागज़ी खानापूर्ति साबित हो रहे हैं। दो हजार से अधिक पट्टे फाइलों में दबे, जनता परेशान नगरपरिषद क्षेत्र में अब तक 2,093 पट्टे लंबित हैं। कृषि भूमि पर बसी स्वीकृत योजनाओं में केवल 29 प्रकरणों का निस्तारण हुआ है। 69ए ऑनलाइन सर्विसेज में 347 प्रकरण पहले से लंबित थे, जिनमें से एक भी निस्तारित नहीं हुआ। निकाय और न्यास प्राधिकरण की योजनाओं के 70 पट्टे भी फाइलों में धूल खा रहे हैं। जनता को राहत देने का दावा करने वाले शिविरों ने असल में नागरिकों को और अधिक निराश कर दिया है।
भवन मानचित्र, नामांतरण और उपविभाजन में सुस्ती का आलम
भवन मानचित्र प्रकरणों में 136 लंबित थे, जिनमें से केवल 13 का निस्तारण हुआ। नाम हस्तांतरण के 170 प्रकरणों में से मात्र 22 निपटाए गए। भूखंडों के उपविभाजन और पुनर्गठन के 136 मामलों में केवल 9 का निस्तारण हुआ। यूडी टैक्स के 22 प्रकरणों में से 10 ही निपटाए गए। आंकड़े बताते हैं कि नगरपरिषद की कार्यप्रणाली केवल दिखावे तक सीमित है और जनता को वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा। 19 दिन में सिर्फ 32 पट्टे, जनता का भरोसा टूटा शिविर की सबसे बड़ी विफलता पट्टा वितरण में रही। बीते 19 दिनों में नगरपरिषद ने केवल 32 पट्टे जारी किए हैं। इनमें 29 कृषि भूमि के और सिर्फ 3 नगरपरिषद स्कीम से जुड़े हैं। इस धीमी रफ्तार ने लाभार्थियों को भटकने पर मजबूर कर दिया है। जनता का भरोसा टूट रहा है और शिविर का असली उद्देश्य अधूरा रह गया है।
जितनी भीड़, उतने पट्टे नहीं
नगरपरिषद में पट्टा वितरण की लेटलतीफी कोई नई बात नहीं है बल्कि पुरानी बीमारी है। हजारों लोगों के पट्टे आज भी फाइलों में कैद हैं, जो अब तक बाहर नहीं निकले। हालात इतने बदतर हैं कि शिविर में पहुंचने वाले वास्तविक लाभार्थियों को कभी कमी बताकर, कभी बहाना बनाकर वापस लौटा दिया जाता है। राहत का वादा करने वाले ये शिविर जनता के लिए केवल भटकाव और ठगी का मंच बनकर रह गए हैं। .....................
इनका कहना है... शहरी सेवा शिविर में जो भी प्रकरण आ रहे है, हम उनका निस्तारण कर रहे है। पूर्व में पट्टो की फाइलों के प्रकरण आए है, इनमें ऑनलाइन नहीं होने सहित कई कमियां है, उनका सत्यापन किया जा रहा है।
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