00:00आपको मालूम है ये हजार करीब नूबल प्राइज दिये जा चुके हैं अब तक
00:04उनमें से ज्यादातर वो हैं जिन्हें नूबल प्राइज पचास से कम की ही उमर में मिला है
00:10शरीर के ढल जाने के बाद बौधिक शमता भी घटने लगती है
00:15ज्यादा तर जो क्रियेटिव वर्क हुआ है वो थर्टीज फॉर्टीज बहुत हुआ पचास आते आते हो जाता है
00:22तो मा का भी शारीरिक स्वर्ण योग कौन सा होता है वही जब वो पंदरा साल से लेकर के पैतीस
00:31साल तक की होती है
00:32और ये जो छोने होते हैं ये मा से मा का स्वर्ण काल छीन लेते हैं
00:38और इन्हें होश भी नहीं होता ख़बर भी नहीं होती ये अपना हक मानते हैं रोना चिलाना और फिर बड़े
00:45हो जाओगे और तुम्हें याद भी नहीं रहेगा कि तुमने उससे क्या छीना था
00:48फिर काओगे अच्छा कुछ छीना भी था तो आप भरपाई कर देंगे ना अब हम कमाने लगे मा का ख्याल
00:53रख लेंगे
00:54मा हो गई बुढ़ी मा ढल गई है
00:57मा पचास पार कर गई पचपन की हो गई है तुम उसे उसकी जवानी लोटा सकते हो
01:03हर तरह की शारेरिक शमता 40-50 के बाद निसंदेह गिरती ही गिरती है
01:09यहां तक क्या आपकी जो कॉगनिटिव फेकल्टी होती है
01:12माने बुद्धिमत्ता वो भी ढलना शुरू कर देती है
01:15अब तुम कहो भी कि चल मा तुझे मैं नई कपड़े दिला देता हूँ
01:19तो इससे क्या हो जाएगा
01:21कर्ज है सबके उपर याद रखना
01:23मा के समय का कर्ज है तुमारे उपर
01:25दूद्ध होगारा तो अलग है
01:27और जब कर्ज उतारा जाता है न तो कोई अहसान नहीं कर दिया जाता
01:30अपनी सिम्धारी पूरी करी जा रही है बस
Comments