00:00ये जो जितने बकरावाज मुर्गावाज है इंसे मैं कहा रहा हूँ तुम एक मुर्गे को पकड़ के दिखा दो खुले
00:05मैदान में और फिर बताओ कि हमारे पूर्वज तो मुर्गा ही चबाया करते थे
00:10काई भाई कैसे चबालिया करते थे आज तो तुमसे वो दोड़ता मुर्गा पकड़ में आनी रहा है तब मुर्गा जंगल
00:16में दोड़ता था बिलकुल खुला तब तुमारे पूर्वज कैसे पकड़ लेते थे मुर्गा ऐसा नहीं है कि हमारे पूर्वज सब
00:22मासाहारी ही थे
00:23आदमी का जासर शडीर है हमारे लिए ज्यादा आसान यही था
00:26कि हम फल, फूल, पत्ते और खाएं
00:29हाँ बीच बीच में कोई शिकार लग गया हाँ तो अच्छी वात
00:34यहीं कुलाचे मारते हिरन को तुम रोज पकड़के नहीं खा सकते
00:39तुम से कहीं ज्यादा कुशल है वो और तीव रहे दोड़ने में
00:46हल तो बिचार लटकरा पेड़ से उसको तुम तोड़ भी लोगे
00:48मुर्गा थोड़ी पेड़ पे लटकराएगी जाके तोड़ा होगे
00:51मुर्गा भी कहेगा है तुमारी भूख कीमती है
00:55हमारी जिंदगी कीमती नहीं हो भग जाएगा ऐसे पकड़ लोगे
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