00:00अगर मीरा कह देती ही कृष्ण पिता हैं, तो थोड़ी उनको सहर पिलाया जाता है, सब भहुत खुछ रहते हैं,
00:07पर मीरा ने कह दिया पती मानती हो, और वही है दूसरा कोई है भी नहीं, ये भी नहीं कि
00:12वो उपर वाले पती है, नीचे वाला भी चलेगा, वो बोली दूसरो
00:29कर दो, पिता विता कुछ नहीं, पती तो पती, लो भाईयो, राणा के पूरे परियार वाले लग गए, इसको खतम
00:38करो, ये तो इजद उचाल रही है, अजा कर बैठ भी केंद के पास रही है, वो जो हमारी लोक
00:47माननेता में, निचले वर्ग के माने जाते हैं, संत्रविदा
00:51हैं, उनसे कह रही है कि शिश्या हूँ आपकी, बड़ी समस्या हुए, मैं बहुरी मेरे राम भरता, वो सब कुछ
01:01है, इसलिए अध्यात्मिक साहित्य में, पत्य को मात्र पिता ही नहीं बोला गया है, पती भी बोला गया है, प्रेमी
01:17भी बोला गया है, प्रेमिका भी बोला �
01:20बच्र ह kell दो अगे हता Reynaud
01:23कि कि कि अगगा है
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