00:00अचारे जी नमस्कार, मैं नेपाल से आई हूँ और मेरे नाम हीरा है, मुझे आप से पुछना था, जैसे इस्तरिया
00:08जूट बोलती है, उसी जूट का सहारा लेकर किसी से मतलब कुछ चाहिए उनको तो कुछ करवाना हो या फिर
00:17जैसे कि सब के सामने उन्हें अच्छा दिखन
00:19इसलिए वो जूट को भी गले लगा लेती हैं, तो ऐसा क्यों करते हैं, इसलिए इंसान है, स्वार्थ है, सारे
00:28तरह के दोश मौझूद है, और बहुत ये बहुत सुंदर बात है, और सम्माननी ये बात है, कि एक महिला
00:36स्वयम ही आकर के कह रही है, सुईकार कर रही है, भरी
00:41सभा में, कि स्वार्थों को पूरा करने के लिए और तमाम और तरीके की कामनाओं के लिए महिलाएं धडले से
00:51खुलम खुला जूट भी खूब बोलती हैं, बाहरी जूट भी और भीतरी जूट भी, दूसरों से भी जूट बोल लेती
00:57हैं, और खुद से भी जूट बोल लेत
01:11का बुदय हो रहा है
01:14सच्चाई ऐसे नहीं आती कि आपको कोई नया सच्चा सिधान्त पता चल गया
01:18सच्चाई आती ही है जूट के साक्षातकार से
01:22मैं कितना बड़ा जूटा हूँ
01:25जिस कोई दिखने लग गया और जो मानने लग गया
01:27समझ लो अब वो सच्च की तरफ बढ़ रहा है
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