00:00मज़े आपसे पुछना था जैसे कि इस्तरिया जूट बोलती हैं उसी जूट का सहारा लेकर किसी से मतलब कुछ चाहिए
00:08उनको तो कुछ करवाना हो या फिर जैसे कि सबके सामने उन्हें अच्छा दिखना होता है इसलिए वो जूट को
00:15भी गले लगा लेती हैं तो ऐसा क्यों
00:17करते हैं कि इंसाने स्वार्थ है सारे तरह के दोश मौजूद है और बहुत सुंदर बात है और सम्माननी ये
00:26बात है कि एक महिला स्वयम ही आकर के कह रही हैं स्विकार कर रही हैं भरी सभा में
00:36कि स्वार्थों को पूरा करने के लिए और तवाम और तरीके की कामनाओं के लिए महिलाए धनले से खुलम खुला
00:43जूट भी खूब बोलती हैं बाहरी जूट भी और भीतरी जूट भी दूसरों से भी जूट बोल लेती हैं और
00:49खुद से भी जूट बोल लेती हैं बिल्कु
01:03सच्चाई ऐसे नहीं आती कि आपको कोई नया सच्चा सिधान्त पता चल गया
01:07सच्चाई आती ही है जूट के साक्षातकार से
01:11मैं कितना बड़ा जूटा हूँ
01:13जिस कोई दिखने लग गया और जो मानने लग गया
01:16समझ लो अब वो सच की तरफ बढ़ रहा है
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