00:00कापि कभी ऐसे होता है कोई चीजар राइटर होता है वो कु लिख रहा होता है बड़े डिखेसर लन माका
00:06हिला राय धार है इसलम कुछ और नखिता है-
00:22दो में अशिर थो कोई खास पैंटिंग हैं तो उसको हम कहते हैं-
00:27और यह हमारा एक cultural hangover है, कि creativity से तो कुछ बहुत sensational पैदा होगा, पर अगर creativity की
00:35परिभाशा है, वो जो अहंकार के न रहने पर होता है, तो अहंकार के न रहने पर तो बस सहजता
00:42रहती है, और सहजता विशेश नहीं होती, समझो ऐसे, तुम मुझे गाली दे दो, मैं गुसे में �
00:49अभी पलट कर गाली दे दो, यह हमारी जो जो सेल्फ है, जो इगो सेल्फ है, उसकी परानी चाल है,
00:55उस घवराएगा और प्रतिक्रिया करेगा, ठीक, पर तुमने गाली भी, और मैं अपने काम में इतना व्यस्त हूं, इतना मुस्रूफ
01:02हूं, कि मैंने बस तुमको ऐसे दे
01:25जो आपके जीवन में जो चोटी चोटी चीजें है, प्रतिपल की किसी ने गाली दे दी आप रियाक्ट कर रहे
01:30हो, वहा तो आप क्रेटिव नहीं हो पाए, ना, बिइंग क्रेटिव मीन्स बिइंग विदाउट योरसल्फ, वह, बिइंग विदाउट योरसल्फ, मैं
01:37हूं �
01:37पर स्वयम से खाली हूं, जीवन के छोटे-छोटे पलो में तो आप स्वयम से खाली हो नहीं, तो इतनी
01:42बड़ी मूवी तुमने कैसे खुद से खाली हो के बना ली, लेकिन हम उस मूवी को उधारण माने के क्रेटिविटी
01:47का बिना ये पूछे कि क्या ये व्यक्ति अपने �
01:50जीवन के इन चोटे लगषणों में, कालखंडों में, in micro instances में खाली था
01:59तो creativity को वो मत माना करो कि
02:01यह हुआ थाल का
02:03यह हुआ थाल का, यह हो गया थाल का, यह कर दिया वो कर दिया
02:06जब वो करते हैं तो वो भी अक तरह का वाइलन सी
02:09क्योंकि is scintillation is the urge to be impressive
02:16मैं इतनी चमक मारूँगा, मैं इतना चकाचॉंध से परिपूर्ण हो जाओंगा कि सब की आखें चुदिया जाएं, यह हिंसा है,
02:25और यह भीतरी खालीपन को दर्शाता है.