00:00नमस्ति आचारे जी मैंने जब भी भी कोशिश किया गीता पढ़ने के लिए वो पढ़के ऐसा लगा कि अरे कृष्ण
00:08भगवाने से बोल रहे हैं मतलब शायद गीता के हर एक श्लोक का जो गलत लोकधार्मिक अर्थ पनाया गया है
00:16ऐसा तो किसी भी ग्रंथ के साथ नहीं हु�
00:20तो मतलब आपसे जुड़के जो समझ में आता है हर एक श्लोक बिल्कुल अलग कह रहा है अगर हम उपनिशद
00:27के साथ हैं हिंदू धर्म के साथ बहुत नाइंसाफी करी है समझ में आ रही है बाद वैदिक दर्शन के
00:34साथ बहुत अन्याय करा है पढ़ने का एक तरीका होता ह
00:39गीता समझनी है तो पहले उपनिशद पढ़ने पढ़ेंगे उपनिशद समझे बिना गीता पढ़ोगे तो कुछ भी उल्जुलूल अर्थ करोगे उसका
00:47उपनिशद ही आम आदमी तक पहुँच सकें इसके लिए गीता आपके सामने उस समवाद के रूप में आती है जो
01:08आ�
01:08पर रिशी बैठे हैं यहां लड़ाई जगडा चल रहा है भाई-भाई का मुकदमा चल रहा है मार पीठ होने
01:14वाली है हतियार बंदूके निकले हुए है उसमें महिलाएं भी शामिल है आप ज्यादा रूची किसमें दिखाते हो जल्दी बोलो
01:24तो एक काम किया गया है कि आपकी रूची जहां जा रही है न यहां यहां रिशियों की बात को
01:31बीच में रख दिया गया है महा भारत के बीच में गीता रख दी गई है
01:34क्योंकि आपको डेली सोफ्स ज्यादा पसंद है पर प्रयास है आप तक दर्शन लेकर के आने का
01:44तो गीता अगर समझनी है तो उसे विश्वास के नहीं दर्शन के माध्यम से समझना पड़ेगा
01:53गीता के माध्यम से मैं आप तक क्या लेकर आ रहा हूं दर्शन उपनिशद लोग सोचते हैं गीता तो भगवान
02:02जी की कता है
02:03भाई वो उपनिशदों की फिलोसफी है और वही हिंदू धर्म है सनातन धर्म विशेश इसलिए है क्योंकि उसके नीचे फिलोसफी
02:12है
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