00:00मुझसे कोई आज से 20 साल, 30 साल पहले पूछता कि क्या आगे अपने आपको ऐसा देखते हो, तो मैं
00:07तो नहीं कहता, संघर्ष बहुत बड़ी बात है, पर निर्बंध आनंद से नीचे की बात है संघर्ष भी, नदिया थोड़ी
00:15संघर्ष करती है, हवाय थोड़ी संघर्ष कर
00:20रहा है क्या, वहां तो सब कुछ सहज बह रहा है, मौज में है, मनुष्य को भी ऐसे ही होना
00:25चाहिए, सहज बहता हुआ, ये सब जो हम अभी कर रहे हैं, मैं ऐसे खड़े हुए हैं, ये अपात काल
00:32की निशानी है, ये कोई ऐसा नहीं है कि अध्यात्म का मतलब ही होता है ये स
00:49ही होना चाहिए, रिश्णी ये थोड़ी कहा रहे हैं कि हमेशा लड़ते ही रहो, कौरोपक चितना सबल हो गया है,
00:56हावी हो गया है, तो लड़ो, लड़ो नहीं तो जितने दुर्योधन है, ये च्छाएंगे भारत पर पूरी दुनिया पर, इसलिए
01:05लड़ो, लेकिन ये को
01:09नहीं कर पाता पूरा, जिसकी बहुत संभावना है, तो जूझने से डरना मत, जूझना कोई आखरी बात नहीं है, किसी
01:16को पाओ की संघर्च नहीं कर रहा, मस्त मौज में है, तो उसको नीचा मत मान लेना, ये कोई नीची
01:20बात नहीं होती, नदी किनारे आप चुप चाप �
01:23बैठे हो, इसमें कोई नीची बात नहीं हो गई, लेकिन हाँ, पीछे गाओं में आग लगी हुई है, तब आप
01:28नदी किनारे चुप चाप बैठे हो, तो ये नीची बात है, मैं चाहता हूँ गाओं की आग को मैं बुझा
01:32दूँ, ताकि सब लोग नदी किनारे चुप चा�
01:48जाना, संघर्ष करना, ठीक है, लेकिन फिर भी आद रखना, कि संघर्ष इसलिए है, ताकि एक दिन संघर्ष न करना
01:57पड़े, हमारी सिद्दगी भले बीच जाय करने में, पर चलो हमारे बात किसी को न करना पड़े
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