00:00कोई वज़य है ना कि प्रत्वी ग्रह पर जीवन है, मंगल पर नहीं है, क्या वज़य है?
00:04कंडिशन्स, कोई ऐसा थोड़ी है कि कोई परमात्मा बैठा है जिसने का प्रत्वी मेरी पसंदीदा है, प्रत्वी पर ही जीवन
00:09होगा
00:09कि कि दूसरे लोग से दिव गुलेल से परमात्मा ने मनुष्य को खैट के फेका, प्रत्वी पर ही जाके लैंड
00:14करे ये, ऐसा तो कुछ नहीं है
00:17यहां कुछ परिस्थितियां हैं, जिनसे इंसान निर्मित हुआ, जब एक खास एक्मोस्फेरिक प्रेशर हुआ, एक खास टेंपरेचर हुआ, तो उससे
00:28इंसान खड़ा हुआ, तुम उन परिस्थितियों को बदल रहे हैं
00:31अच्छा यहां धूली-धूल होती, तो इंसान होता हुआ, जब इंसान नहीं हुआ, तो धूल कितनी थी, एक यूआ कितना
00:36रहा होगा, इसी बहुत शान जगे पर चले जाओ, तो वहां पर एक यूआ एक से भी नीचे होता है,
00:41जब एक यूआ इतना कम था तब जाकरके, इ
01:01तुम इस दुनिया में कहीं से आये नहीं हो
01:02तुम इसी मिट्टी से उठेओ
01:04क्योंकि यहां पर कुछ विशेश परिस्थितियां थी
01:07तुम उनी परिस्थितियों से शेठाड़ कर रहे हो
01:10तुम दुवारा मिट्टी हो जाओगे
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