00:00अच्झेज अच्छेज कार्दा ।
00:32इरान और अमेरिका के बीच हाल ही में बनी सीज फायर की स्थिती अब एक बार फिर खत्रे में नजर
00:38आ रही है।
01:00जहाजों को पहले इरानी अनुमती लेनी होगी। बिना मन्जूरी किसी भी जहाज की आवाजाही को इरान ने असवी कारे बताया
01:07है और कारेवाही की धमकी दी है। लेकिन बड़ा सवाल है कि आखिर इरान ने अभी ही ऐसा बयान क्यूं
01:13दिया। दरसल इसके पीछे सिर्फ सम
01:28ही हो पाया। दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद, परमाणू कारिक्रम, प्रतिबंध यानी सैंक्शन्स, क्षेत्रिय प्रभाव और सैन्य मौजूदगी अभी
01:37भी खत्म नहीं हुए है। इरान को डर है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश सीस्पायर का इस्तिमाल �
01:43अपनी रणनीतिक स्थिती मजबूत करने के लिए कर सकते हैं। वहीं अमेरिका लगातार चाहता है कि इरान क्षेत्र में अपनी
01:50सैन्य गतिविधिया और समुद्री नियंत्रण कम करें। यही कारण है कि तेहरान ने हॉर्मुज को लेकर सख्त संदेश दिया है।
01:57विशेश
02:10हत्यार अभी भी समुद्री रास्तों पर प्रभाव है। आयार जीसी का ये बयान सिर्फ जहाजों के लिए नहीं बलकि अमेरिका,
02:17इस्राइल और खाड़ी देशों के लिए भी एक संदेश माना जा रहा है। क्योंकि पिछले तनावों में भी इरान ने
02:22कई बार समुद्री
02:23क्षेत्र को अपनी ताकत दिखाने के लिए इस्तिमाल किया है। पहले भी आयार जीसी ने विदेशी जहाजों को रोका, उनकी
02:30जांच की और कुछ मामलों में कबजे में लिया। अब चिंता ये है कि अगर कोई अमेरिकी सहयोगी देश का
02:35जहाज इस आदेश को चुनोती द
02:37देता है, तो स्थिती तेजी से बिगड सकती है। अमेरिका पहले ही साफ कर चुका है कि वो अंतरराष्ट्रिय समुद्री
02:43रास्तों पर किसी भी तरह की रोक को स्वीकार नहीं करेगा। वाशिंग्टन का कहना है कि किसी भी देश को
02:49वैश्विक व्यापार मार्गों पर एक
03:05पूरे समीकरण को और खतरनाग बना रही है। दोनों देशों के बीच सीधा टकराव भले ही फिलहाल कम हुआ हो
03:11लेकिन मिसाइल हमलों सैन्ने गतिविधियों और राजनीतिक बयान बाजी ने तनाव को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है। विशलेशकों
03:19का मानना है कि �
03:19आने वाले दिनों में परमाणू मुद्दे या क्षेत्रिय हमलों को लेकर कोई नया विवाद शुरू होता है तो ये सीस
03:26फायर फिर से तूट सकता है। और ऐसी स्थिती में स्ट्रेट ओफ हॉर्मोज सबसे पहला दबाव वाला क्षेत्र बन सकता
03:32है। क्योंकि इरान जानत
03:48दबावनी सिर्फ एक बयान महीं बलकि उस बड़े संघश की आहट हो सकती है जिसमें कूटनीती, उर्जा और सैन्य ताकत
03:55तीनों दाव पर लगे हैं।
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