00:16पार्लिमेंट के अंदर एक सीधा बयान दिया गया ओपरेशन सिंदूर में कोई डेथ नहीं हुई
00:22लेकिन आज नैशनल वार मेमोरियल की दीवार पर एक बिलकुल अलग सच्चाई दर्ज है
00:29छै भारतिया सैनिकों के नाम जिन्होंने इसी ओपरेशन सिंदूर के दोरान देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया
00:37ओपरेशन सिंदूर को देश के सामने एक सफल और strategically controlled military operation के रूप में प्रस्टुत किया गया था
00:45उस समय पार्लिमेंट में दिये गए बयान और ओफिशल ब्रीफिंग्स में ये स्पष्ट धारणा दी गई थी कि ओपरेशन के
00:53दौरान किसी भी भारतिय सैनिक की मिर्त्यों की पुष्टी नहीं हुई है।
00:57इस स्टेट्मेंट ने उस समय पब्लिक अंडस्टैंडिंग को भी शेप किया कि मिशन पूरी तहा सक्सेस्फुल रहा और कोई फेटल
01:05लॉस नहीं हुआ। लेकिन अब एक साल बाद उफिशल मिलिटरी रेकगनिशन एक अलग तस्वीर सामने रखता है।
01:14नई दिल्ली स्थित नाशनल वार मेमोरियल के रोल ओफ ओनर और त्याग चक्र 3D वाल में छे भारती असैनिकों के
01:21नाम स्थाई रूप से अंकित किये गए हैं।
01:24इन छे वीर जवानों के नाम हैं।
01:55इन नामों को न केवल दीवार पर अंकित किया गया है बलकि इन्हें उफिशल डिजिटल रोल ओफ ओनर में भी
02:02शामिल किया गया है।
02:03और यहीं से शुरू होता है पूरा विवाद और पब्लिक डिबेट।
02:07एक तरफ पार्लिमेंट में दिया गया स्टेटमेंट नो डेट्स डूरिंग ऑपरेशन सिंदूर और दूसरी तरफ उफिशल मेमोरियल रेकॉर्ड
02:19इन दोनों स्टेटमेंट्स के बीच का अंतर अब सवालों के घेरे में है।
02:24ये सवाल अब सिर्फ लैंग्विज या वर्डिंग का नहीं रहा।
02:27ये सवाल बन गया है टाइमिंग, डिस्क्लोजर और कम्यूनिकेशन क्लारिटी का।
02:33डिफेंस ऑपरेशन्स में ये सामान्य प्रक्रिया होती है कि सेंसिटिव इन्फरमेशन तुरंत पब्लिक नहीं की जाती।
02:40ओपरेशनल सीक्रिसी, टैक्टिकल अड्वांटेज और फैमिली नोटिफिकेशन जैसे कारणों से कैजूल्टी डीटेल्स कई बार डिलेड मैनर में सामने आती हैं।
02:50लेकिन इस मामले में क्रिटिक्स और पब्लिक डिसकोर्स का कहना है कि इशू सिर्फ डीले का नहीं है, इशू क्लारिटी
02:56और अबसल्यूट वर्डिंग का भी है।
02:58क्योंकि नोटिफ्स जैसे अबसल्यूट स्टेटमेंट पब्लिक परसेप्शन को एक फाइनल कंक्लूजन दे देता है।
03:05और जब बाद में उफिशल रिकॉर्ड में सोल्जर्स की शहादत दर्ज होती है, तो वही स्टेटमेंट सवालों के केंद्र में
03:12आ जाता है।
03:13सोशल मीडिया और पब्लिक डिबेट में अब ये चर्चा तेज है कि क्या पार्लिमेंट में दिया गया स्टेटमेंट उस समय
03:20की इनकंप्लीट ओपरेशनल इन्फरमेशन पर आधारित था, या फिर कम्यूनिकेशन में ये गैप सिस्टम लेवल इशू को दिखाता है।
03:28कुछ लोगों का मानना है कि मिलिटरी ओपरेशन्स में इन्फरमेशन हमेशा फेजड मैनर में आती है और अरली स्टेटमेंट को
03:36फाइनल ट्रूथ नहीं माना जाना चाहिए।
03:38वही दूसरी और एक बड़ा वर्ग ये सवाल उठाया है कि पारलीमेंट जैसे हाइस्ट फोरम पर इस्तिमाल किये गए शब्द
03:45इतने एब्सल्यूट क्यों थे? क्योंकि पारलीमेंट में दिया गया हर स्टेटमेंट सिर्फ इन्फरमेशन नहीं होता, वो पबलिक ट्रस्�
04:05लिए अपनी जान दी, लेकिन उसी के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा है, जब उफिशल ओनर रेकॉर्ड्स और अरलियर
04:12पारलीमेंटरी स्टेटमेंट्स के बीच इतना सपष्ट अंतर दिखता है, तो जनता किस नारेटिव को आधार माने? ये बहस अब सिर्फ
04:20ओपरे�
04:34रेकॉर्डिट फाक्ट है, मुद्धा ये है कि उस समय देश को क्या बताया गया था और बाद में क्या सामने
04:40आया? क्योंकि जब पारलिमेंट की बात और नैशनल वार मेमोरियल का रेकॉर्ड अलग-अलग कहानी कहने लगे, तो सवाल किसी
04:48एक बयान का नहीं रहता, सवाल �
04:50पूरे कम्यूनिकेशन सिस्टम की क्लारिटी का बन जाता है.
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