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US-Iran Conflict: कभी गहरे दोस्त थे US और Iran, फिर कैसे बन गए जानी दुश्मन? जानिए पूरी कहानी | Oneindia Hindi
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच क्या आप जानते हैं कि आज जो अमेरिका और ईरान एक-दूसरे के खून के प्यासे हैं, वे कभी सबसे करीबी सहयोगी हुआ करते थे? जानिए इस ऐतिहासिक दुश्मनी के पीछे छिपे तेल और सत्ता के गहरे राज़।

आज पूरी दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच चरम पर पहुंचे तनाव पर टिकी हुई हैं। लेकिन रणनीतिक विश्लेषक और इतिहासकार जानते हैं कि इस भीषण दुश्मनी की शुरुआत किसी हालिया मिसाइल हमले या परमाणु कार्यक्रम से नहीं हुई थी। इसकी जड़ें करीब 70 साल पीछे साल 1951 में जाती हैं, जब ईरान में लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए बेहद लोकप्रिय प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्देक (Mohammad Mossadegh) ने सत्ता संभाली थी। मोसद्देक ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए ईरान के विशाल तेल भंडार और तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण (Nationalization of Oil Industry) कर दिया, जिसने ब्रिटेन और अमेरिकी कंपनियों के आर्थिक साम्राज्य को सीधी चुनौती दी।

शीत युद्ध (Cold War) के उस दौर में सोवियत संघ के बढ़ते प्रभाव और तेल पर अपना नियंत्रण खोने के डर से बौखलाए अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर एक बेहद गुप्त और खौफनाक साजिश रची। साल 1953 में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) और ब्रिटिश एमआई6 (MI6) ने मिलकर 'ऑपरेशन एजैक्स' (Operation Ajax) को अंजाम दिया। इस गुप्त ऑपरेशन के तहत ईरान की सड़कों पर हिंसक विरोध प्रदर्शन प्रायोजित किए गए, मीडिया के जरिए प्रोपेगैंडा फैलाया गया और अंततः सेना की मदद से एक लोकतांत्रिक सरकार का तख्तापलट कर दिया गया। इसके बाद अमेरिका ने अपनी कठपुतली माने जाने वाले शाह मोहम्मद रजा पहलवी (Shah Mohammad Reza Pahlavi) को असीमित ताकतों के साथ ईरान के सिंहासन पर दोबारा बैठा दिया।

शाह के क्रूर शासन और उनकी गुप्त पुलिस 'सावाक' (SAVAK) द्वारा किए गए मानवाधिकारों के दमन ने ईरान की जनता के भीतर अमेरिका के खिलाफ गुस्से की एक ऐसी चिंगारी सुलगानी शुरू की, जो 1970 के दशक के अंत में आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी (Ayatollah Ruhollah Khomeini) के नेतृत्व में 'इस्लामिक क्रांति' (Islamic Revolution) के रूप में फूट पड़ी।

इस रिपोर्ट में हम आपको इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के जरिए समझाएंगे कि कैसे दो पूर्व सहयोगियों की यह जंग आज पूरी दुनिया के व्यापार, वैश्विक सप्लाई चेन और वहां रह रहे लाखों भारतीयों की जिंदगी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है।

About the Story:
Delve into the 70-year-old history of the US-Iran conflict, tracing how two close allies became bitter enemies. This comprehensive report covers the 1951 nationalization of Iran's oil by PM Mohammad Mossadegh, the infamous 1953 CIA-MI6 orchestrated coup known as 'Operation Ajax', the oppressive rule of Shah Reza Pahlavi, and the eventual 1979 Islamic Revolution led by Ayatollah Khomeini that reshaped Middle Eastern geopolitics and War keeping Lakhs of Indians in Danger.

#USIranConflict #IndianDiaspora #OperationAjax #IranHistory #MiddleEastCrisis #CIA #IndianinGulf

~PR.514~HT.408~ED.276~GR.538~VG.HM~

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Transcript
00:00मिडिल इस्ट से एक बार फिर दिल दहला देने वली खबर आ रही है
00:03सीज़ फायर की बाद अमेरिका ने इरान पर हमला किया और इरान ने भी अमेरिका पर पलट वार किया और
00:09ये युद्ध फिर से शुड़ू हो चुका है
00:10अज पूरी दुनिया की नजरे मिडिलिस्ट पर टिकी हुई है
00:14एक तरफ अमेरिका है दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य और आर्थिक ताकत
00:18दूसरी तरफ है इरान जो पिछले कई दशकों से पश्चिमी देशों की नीतियों को खुली चुनौती देता आया है
00:24कभी मिसाइल हमले, कभी आर्थिक प्रतिबंध, कभी प्रॉक्सी और कभी पर्मानु कारेक्रम को लेकर बढ़ता तनाओ
00:30हर कुछ महीनों में दुनिया को ये डर सताने लगता है कि कहीं ये टकराओ, तीसरे विश्वयुद्ध की शुरू आतना
00:37बन जाए
00:37लेकिन क्या ये दुश्मनी अचानक शुरू हुई है, क्या ये दुश्मनी 2-5 सालों की देन है, क्या इसकी जड़
00:44सिर्फ इरान का पर्मानु कारेक्रम है
00:46या इसके पीछे कोई ऐसी कहाने चिपी है जिसे दुनिया अकसर भूल जाती है
00:51सच ये है कि अमेरिका और इरान की दुश्मनी की शुरूआत किसी मिसाइल या पर्मानु बम से नहीं हुई थी
00:57इसकी शुरूआत हुई थी सत्ता, तेल और विदेशी दखल की राजनीती से
01:02ये कहानी हमें करीब 70 साल पीछे ले जाती है
01:05जब इरान और अमेरिका दुनों देश दुश्मन नहीं थे बलकि करीबी सहयोगी हुआ करते हैं
01:10तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि दो करीबी सहयोगी ऐसे कटर दुश्मन बन गए कि आज उनकी दुश्मनी की आग
01:17में पूरी दुनिया जल रही है
01:19खास कर भारत के लिहाज से देखें तो मिडल इस्ट के लाखो भारतिया हर रोज जिन्दगी की जंग लड़ रहे
01:25हैं
01:25तीन भागों में हम इसे युद की पूरी कहानी आपको सुनाएंगे
01:30नमस्कार मेरा नाम है रिचा पराशर और आप देख रहे हैं One India Hindi
01:33पहला भाग दोस्ती दुश्मनी में कैसे बदली उस दौर में इरान दुनिया के सबसे महत्वपुन तेल उत्पादक देशों में गिना
01:40जाता था
01:41पश्च्चमी देशों की नजरें उसके विशाल तेल भंडार पर थी
01:44लेकिन इरान के लोगों के मन में एक सवाल लगतार उठ रहा था
01:49जब देल उनका है तो सबसे ज्यादा फाइदा विदेशी कंपनियों को क्यों मिल रहा है
01:54यही सवाल आगे चलकर पूरे देश में राजनितिक आंदोलन का कारण बना
01:59और फिर इतिहास ने ऐसा मोड लिया जिसने आने वाली कई पीडियों की किस्मत बदल दी
02:04साल 1951 में मुहमद मोस्देक इरान के प्रधानमंतरी बने
02:09वे लोग तांतरिक तरीके से चुने गए नेता थे और जन्ता के बीच बेहद लोग प्रियत है
02:14उन्होंने सत्ता संभालते ही एक ऐसा फैसला लिया जिसने ब्रिटेन और अमेरिका दोनों को परिशान कर दिया
02:21मुस्देक ने इरान के तेल उद्योग का राष्ट्य करन कर दिया
02:25अब तक ब्रिटिश कमपनिया इरान के तेल से भारी मुनाफ़ा कमा रही थी
02:29लेकिन इस फैसले के बाद उनकी आर्थिक ताकत को सीधी चुनोती मिल गई
02:34ब्रिटेन ने पहले आर्थिक दबाब बनाया फिर अंतराष्ट्य स्तर पर इरान को अलग थलग करने की कोशिश की
02:40लेकिन जब इससे भी बात नहीं बनी तो उसने अमेरिका से मदद मांगी
02:59गुप्त ओपरेशन जिसने इतिहास बदल दिया
03:02साल 1903 में अमेरिका की CIA और ब्रिटेन की MI6 ने मिलकर एक गुप्त योजना तयार
03:10इस योजना का उदेश था प्रधान मंतरी मुहम्मद मोसडेक की सरकार को गिराना
03:15इस ओपरेशन को बाद में दुनिया ने ओपरेशन एजैक्स के नाम से जाना
03:19सडकों पर विरोध प्रधर्शन करवाई गए
03:21मीजिया के जरिये माहौल बदला गया
03:24राजनितिक निताओं को प्रभावित किया गया
03:26और आखिरकार सेना की मदद से मुसडेक की सरकार का तक्ता पलट कर दिया गया
03:32इसके बाद शाह मुहम्मद रजा पहलवी को पूरी ताकत के साथ सत्ता में वापस बिठाया गया
03:37अमेरिका के लिए ये एक रणितिक जीत थी
03:39लेकिन इरान के लाखो लोगों के लिए ये उनकी लोगतांतरिक इक्षा पर सीधा हमला था
03:45यहीं से इरान की जनता के दिल में अमेरिका के प्रती अविश्वास की नियू पड़ गई
03:50शाहका, शासन, आधुनिक्ता और विकास की बात तो करता था
03:53लेकिन इसका साथ साथ राजनितिक विरोधियों पर कड़ा दमन भी बढ़ाता गया
03:58गुप्त पुलिस सावाक पर मानवाधिकार उलंगन के गंभीर आरोप लगने लगे
04:03हजारों लोगों को गिरफतार किया गया, विरोध की आवासों को दबाया गया
04:08और जन्ता के भीतर और संतोश धीरी-धीरे उबलने लगा
04:11अमेरिका लगतार शाह का समर्थन करता रहा
04:14क्योंकि उसके लिए इरान मिडिल इस्ट में एक महतोपुन सही होगी था
04:19लेकिन यही समर्थन आगे चलकर अमेरिका के लिए सबसे बड़ी राश्वितिक चुनोती बनने वाला था
04:24जन्ता का गुस्सा अब सिर्फ शाह के खिलाफ नहीं था
04:27बलकि उस ताकत के खिलाफ भी था जिसने शाह को सत्ता में बनाये रखा था
04:311970 के दर्शट के आखिर तक हारात विस्पोटक हो चुगे थे
04:36मस्जिदों, विश्वविद्यालयों और सडकों पर विरोध तेज होने रगे थे
04:41नर्वासन में रह रहे एक धार्मिक नेता का नाम तेजी से लोगों की जुबान पर आने लगा था
04:50किसी ने नहीं सोचा था कि यही व्यक्ति आने वाले कुछ महीनों में न सर्फ इरान की राजनीती बदल देगा
04:56बलकि अमेरिका और इरान के रिष्टों को हमेशा के लिए दुश्मनी में बदल देगा
05:01यही से शुड़ू होती है इरान की इसलामिक क्रांती की कहानी और यही से आपको अब भाग दो मिलने चलते
05:07हैं
05:07इसलामिक क्रांती से पर्मानु संकट साल 1989 यही वो साल था जुसने न सर्फ इरान की राजनीती बदल दी बलकि
05:15पूरी दुनिया की कूटनीती को भी एक नई दिशा दे दी
05:18महीनों तक चले जो नांदोलन के बाद शाह मुहम्मद रजा पहलवी देश छोड़ कर भाग गए
05:23कुछी दिनों बाद निर्वासन में रहने लगे और आयातुला रुहुला हुमैनी को इरान की सत्ता दे दी गई
05:30उनकी वापसी हुई लाखो लोग सडकों पर उनका स्वागत करने उमड पड़े यह सिर्फ एक नेता की वापसी नहीं थी
05:37बलकि एक नए इरान का जन था
05:39कुछी महीनों में राज शाही खत्म हो गई और इरान आधिकारिक रूप से एक इसलामिक रिपब्लिक बढ़ गया
05:45लेकिन करांधी के बाद सबसे बड़ा सवाल ये था कि अमेरिका का क्या होगा
05:49आखिर वो देश जिसने दशकों तक शाह का समर्थन किया था क्या नए इरान को स्विकार करेगा
05:56दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद अविश्वास अब खुली दुश्मनी में बदलने वाला था
06:00इसे भी चक ऐसी घटना हुई जिसने दोनों देशों के रिष्टों को पूरी तरह दोर दिया
06:06नमेंबर 1989 में सैकडो इरानी चात्रों ने तहरान स्धित अमेरिकी दुटावास पर कबजा कर लिया
06:14उनका आरोप था कि अमेरिका शाह को शरन देकर फिर से सत्ता मिलाने की साजुष कर रहा है
06:20दुटावास के 52 अमेरिकी कर्मचारियों को बंधक बना लिया गया
06:23ये बंधक संकट पूरे 444 दिनों तक चला
06:27दुनिया हर दिन इस खबर पर नज़र रखे हुई थी
06:30अमेरिका के लिए ये राष्ट्री अपमान था जबकि इरान में इसे विदेशी हस्तशेप के खिलाब जीद के रूप में देखा
06:36गया
06:37अमेरिकी राष्ट्रपती जिमी कॉटर ने बंधकों को चुड़ाने के लिए एक गुपत सैन अभियान चलाया
06:42लेकिन रेगिस्तान में तकनीकी खरावी और दुरखटनाओं के कारण ये मिशन पूरी तरह असफ़ल हो गया
06:48कई अमेरिके सैनिक मारे गए अमेरिका की प्रतिष्ठा को गहरा जटका लगा
06:54इसी घटना के बाद अमेरिका ने इरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिये
06:59जो समय के साथ और सक्त होते चले गए
07:02उनने सौसी का दशक दोनों देशों के लिए और भी उतल फुतल भरा साबित हुआ
07:06इराक के राश्वपती सद्दाम हुसेन ने इरान पर हमला कर दिया
07:09शुरू हुआ आठ साल लंबा इरान इराक युद्ध जिसमें लाखों लोग मारे गए
07:15अमेरिका ने सीधे युद्ध में हिस्सा नहीं लिया लेकिन उसने इराक को
07:18खूफिया जानकारी, आर्थिक सहायता और कई तरह का अप्रत्यक्षिस्तमर्थन दिया
07:23इरान के लोगों को ये साफ संदेश मिला कि अमेरिका अब उनका विरोधी बन चुका है
07:28युद्ध के दोरान एक दर्दनाक और घटना घटी
07:31साल 1988 में अमेरिकीन और सेना के युदपोर्ट USS Vincennes ने गलती से
07:38इरान एयर की फ्लाइट च्छे सो पचपन को मिसायल से मार किराया
07:42विमान में सवार सभी 290 लोग मारे गए जिनमें बड़ी संख्या में महिलाया और बच्चे भी थे
07:47अमेरिका ने इसे मानविय भूल बताया लेकिन इरान ने इसे कभी स्विकार ने यह घटना आज भी दोनों देशों के
07:53बीच गहरे अविश्वास का प्रतीक मानी जाती है
07:561990 के दशक में सोवियत संग टूट चुका था लेकिन अमेरिका और इरान की दुश्मनी खत्म नहीं हुई थे इसके
08:01उलट अमेरिका ने इरान पर आतंकवादी संगठनों का समर्थन करने हिजबुल्ला और हमास जैसे समूहों को मदद देने तथा मिडिल
08:10इस्ट में अस्थि
08:25दुनिया का ध्यान एक बार फिर इरान की ओर खीज लिया खुलासा हुआ कि इरान गुप्त रूप से परवाणू सुविधाये
08:31विक्सिद कर रहा है अमेरिका और पश्रिमी देशों को डर था कि इरान परवाणू हत्यार बनाने की दिशा में बढ़
08:39रहा है हलाकि इरान ल�
08:53रैंकिंग व्यवस्था और अंतराष्टिय व्यापार पर बहुत भारी असर पड़ा इरानी अर्थ व्यवस्था दवाब में आ गई रिकिन इसके बावजू
09:01तेहरान ने अपने पर्माणू कारेक्रम को पूरी तरे बंद नहीं किया
09:042013 में जब हसन रुहानी राष्टुपती बने तब पहली बार दोनों देशों के बीच बाप्चीत की उम्मीद जगी
09:12कई दौर की कठीन वारताओं के बाद 2015 में एक अतिहासिक समझोता हुआ जिसे दुनिया ने इरान नुक्लियर डील के
09:20नाम से जाना
09:20इस समझोते के तहट इरान ने अपने परमाणू कारेकरम पर कई सीमाय स्विकार की और बदले में उस पर लगे
09:27कई आर्थिक प्रतिबन हटाए गए
09:29उस समय से लगा कि शायद 35 साल पुराने दुश्मनी अब धीरे-धीरे खत्म होने लगी
09:34लेकिन ये उमिद ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी
09:372018 में अमेरिका के नए राष्ट पती डॉनल्ड ट्रम्प ने इस समझोते से बाहर निकलने का फैसला की
09:43उनका आरोप था कि ये डील अमेरिका के हेतों की रक्षा नहीं करती और इरान को भविश्य में परमाणू हत्यार
09:49बनाने से नहीं रोख सकती
09:51समझोते से बाहर निकलते ही अमेरिका ने इरान पर पहले से भी अधिक कड़े प्रतिबंध लगा दी
09:56इसके बाद हालात फिर तेजी से बिगड़ने रग एरान ने भी परमाणू समझोते की कई शर्तों का पालन करना बन
10:03कर दिया
10:04तोनों देशों के बीच तनाओ एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुँच गया लेकिन सबसे बड़ा विस्पोर्ट अभी बाकी था
10:10साल 2020 साल 2020 पे एक ऐसा हमला हुआ जिसने पूरी दुनिया को ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि
10:17अब शायद खुला युद शुड़ होने वाला है
10:20भागती सुलेमानी की मौत से आज तक क्या कभी खत्म होगी ये दुश्मनी
10:24जनवरी 2020 दुनिया नएस साल का स्वागत कर रही थी कि मध्यपुरूर से एक ऐसी खबर आई जिसने पूरी दुनिया
10:30को जब जोड़ दिया
10:31अमेरिका ने इराक की राजधानी बगदाद एरपोर्ट से बाहर ड्रोन स्ट्राइक कर इरान के सबसे ताकतवर सैन्य कमांडरों में से
10:39एक जनरल कासीम सुलेमानी को मार किराया
10:42अमेरिका का दावा था कि सुलेमानी अमेरिकी सैनिकों को और उनकी हितों पर हमलों की योजना बना रहे हैं
10:48वही इरान ने इसे अपनी संप्रभुता और राष्ट्रिय सम्मान पर सीधा हमला बताया
10:54सुलेमानी की मौत के बाद लाखों लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए
10:58इरान ने कुछी दिनों बाद इराक में मौजूद अमेरिकी सैने ठिकानों पर दरजनों बैलिस्टिक मसाइले दागी
11:04कई सैने खायल हुए लेकिन दोनों देशों ने पूर्ण युद से बचने की कोशिश की दुनिया ने रहत की सास
11:10भी ली लेकिन ये साफ हो गया कि
11:12अमेरिका और इरान के बीच विश्वास की कोई गुणजाईश अब लगभग खत्म हो चुकी इसी दोरान इरान ने अपने पर्मानू
11:19कारेक्रम को पहले से कहीं अधिक तेज गती से आगी बढ़ाना शुरू कर दिया
11:23यूरेनियम समवर्धन का स्तर बढ़ाया गया नई सेंट्रिफ्यूज मशीने लगाई गई और अंतराष्टिय पर्मानू उर्जा एजनसी यानि की IAEA के
11:32साथ सहयोग भी समित होने लगा
11:34पश्चिमी देशों ने बार-बार चेतावनी दिखिए अगर यही रफतार रही तो इरान हतियार ग्रेड यूरेनियम की बहत करीब पहुँच
11:41सकता है
11:41दूसरी और इरान लगतार यही कहता रहा कि उसका कारेक्रम पूरी तरफ शान्तिपूर्ण उदेश्यों के लिए है
12:04लंबी चली लेकिन नतीजा शूने रहा फिर आया साथ ओक्टूबर 2023 हमास के इसराइल पर हमले के बाद पूरा मध्यपूर
12:15वयुद्ध की आग में जुलस में लगा
12:16अमेरिका खुल कर इसराइल के समर्थन में उतर आया जबकि इरान ने फिरिस्तिनी समुहों और अपने छित्रिया सहयोगियों के समर्थन
12:24को जारी रखा
12:25इसके बाद लाल सागर, सीरिया, इराक और लेबनान में अमेरिका समर्थित और इरान समर्थित समूहों के बीच लगतार हमले होने
12:33लगे
12:34चित्रिय तनाव अब वैश्मिक चिंता बन चुका था
12:37अप्रेल 2024 में एतिहास में पहली बार इरान ने सीधे अपने जमीन से इसराइल पर सैकडो, ड्रोन और मिसाइले दाग
12:45दी
12:45जवाब में इसराइल ने भी इरान की अंदर चुनिंदा सैने चिकानों को निशाना बनाया हलाकि अमेरिका सीधे युद में नहीं
12:52उत्रा
12:52लेकिन उसने इसराइल की हवाई सुरक्षा में महत्यकुन भूमी का निभाई
12:56ये सपश्ट हो गया कि अमेरिका और इरान अब प्रत्यक्ष टकराव से केवल एक कदम दूर खड़े हैं
13:03इसके बाद 2025 और 2026 में भी तनाव पूरी तरह फत्म नहीं हुआ
13:07परमानु कारेक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, खाड़ी शेत्र में सैन्य गतिविधियां, प्रॉक्सी संगठनों की भूमी का
13:13और पश्चिमेशिया की बदलती राजनीती लगतार दोनों देशों के रिष्टों को प्रभावित करती रहे
13:18समय समय पर बाचीत की कोशिशे हुई, लेकिन अव विश्वास इतना गहरा है कि कोई स्थाई समधान अभी तक सामने
13:26नहीं आ सका
13:27आर जिस्ति ये है कि अमेरिका और इरान सिधे युद्ध लड़ रहे हैं
13:31लेकिन दोनों देशों के बीच एक शेडो वर और परोक्ष संगर्ष भी लगतार जारी है
13:37कभी साइबर हमले, कभी आर्थिक प्रतिबंद, कभी समुद्री टकराव, कभी प्रॉक्सी सा गठनों के जरिये दोनों देश एक दूसरे पर
13:43दवाब बनाने की कोशिश कर रहे है
13:45हर नई घटना पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा रही है, क्योंकि यदि ये संगर्ष जंग में और वर्ल्ड वार में
13:53तबदील हो जाता है
13:54तो उसका असर केवल मध्यपुर्व तक सिमित नहीं रहेगा, बलकि वैश्विक अर्थवेवस्था, तेल की कीमतों और अंतराष्ट्य सुरक्षा पर इसका
14:02बेहत बुरा असर पड़ेगा
14:03आपको पता ही है, अभी उमीद की जा रहे थी कि फरवरी के अंतर में जो शुरू हुआ जंग है
14:07इरान, अमेरिका और इसराइल के बीच का, ये जंग शायद अब रुक जाएगा
14:12सीज़ फायर की खबरे आई, स्विजलेंड गए दोनों देश, बाचीत की टेबल पर बैठे, पाकिस्तान ने मदेस्ता कराने की कोशिश
14:19की, लेकिन रिजल्ट क्या निकला, बाचीत नहीं हो पाई, पूर्ण नहीं हो पाई, और फिर खबर आ रही है कि
14:26अमेरिका ने पहले �
14:27इरान पर हमला किया और फिर इरान ने पलट वार करी, कुल मिलाकर करीब साथ दशक पहले शुरू हुई, अमेरिका
14:32और इरान की ये कहानी सिर्फ दो देशों की दुश्मनी नहीं है, ये सक्ता, संसाधनों, विचारधारा, छेत्रिय प्रभाव और वैश्विक
14:39राजनीती की
15:08ऐसी जटिल कहानी है, जिसने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है।
15:14पूरी तरह समाप्त नहीं होगा और ये होता दिखाई भी नहीं दे रहा है।
15:40जो एक संकट के दौर से गुजर रहा है और संकट के बीच में हैं, अमेरिका, इरान और इस्राइल इनके
15:46बीच जारी जंग और मिडिलिस्ट में फसे और रह रहे हैं लाखों भातिया।
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