00:00कि दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक और आथिक शत्रंज के बौड पर एक ऐसी चाल चली जा चुकी है जो
00:06भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों की पूरी तस्वीर बदल देगी।
00:09क्या भारत के बजार में एक बर फिर इरानी तेल की नदिया बहने वाली है।
00:13दिल्ली के सियासी गलियारों में इस वक्त एक ऐसी हल चल है जिसकी गूँज वाशिंग्टन से लेकर मौस्को तक सुनाई
00:19दे रही।
00:20देशों के उर्जा मंत्रियों की बैठक के बहाने इरान के पेट्रोले मंत्री मौसीन पाकनिजाद दिल्ली पहुँचे।
00:27लेकिन असली खेल इस बैठक के पीछे चल रही बाइलेटरल टॉक्स में छिपा है।
00:31आते ही इरानी मंत्री ने एक ऐसा धमाका किया है जिसने वैश्विक तेल बजार में तेहलका मचा दिया है।
00:36इरान के तेल मंत्री मौसीन पाकनिजाद ने दिल्ली आते ही साफ कर दिया है कि इरान भारत के साथ आर्थिक
00:43और खास कर उजच हीतर में हर संभव सहयोग के लिए पूरी तरह तयार है।
01:06इरान भारत के साथ तेल और गयास सेक्टर में नए निवेश और सप्लाई को फिर से बहाल करना चाता है।
01:12इस पूरी डील की कहराई को समझने के लिए आए आपको इतिहास के उस दौर में ले चलते हैं जब
01:17इरान पर अमेरिका पृतिबंद नहीं लगे थे।
01:20साल 2018-19 से पहले एरान भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश हुआ करता था।
01:26और जानते हैं क्यों? क्योंकि भारत और इरान के बीच एक ऐसी वेवस था थी जिसने अमेरिकी डॉलर की छुट्टी
01:32गर्दी थी।
01:33आए आपको इसके चार बड़े फाइदे समझाते हैं।
01:36पहला रुपए में पेमेंट भारत इरान से जो भी तेल खरीता था उसका 45 प्रतीशत भुकतान डॉलर में नहीं बलकि
01:43सीधे हमारी अपनी करेंसी यानि भारती रुपए में होती थी।
01:47इसके लिए भारत के एक बैंक, UCO बैंक में इरान का विशेश हाता खोला गया था।
01:52दूसरा, बार्टर सिस्टम। इरान उस रुपए का इस्तिमाल भारत से बासमती चावल, गेहू, चीनी, चाय और दवाया खरीदने के लिए
02:00करता था।
02:00एनि भारत का पैसा गूंकर वापस भारत के ही किसानों और व्यपारियों के पास आ जाता था।
02:06हमारी एकॉनिमी को डबल फाइदा होता था।
02:09तीसरा, फ्री शिपिंग और इंशरन्स
02:11एरान भारत को तेल बेचने के लिए इतना बेताब रहता था कि वो भारतिये डिफाइनरी को मुफ्त में समुदरी जहाज
02:17और मुफ्त बीमा की सुविदा खुद देता था।
02:20चौत था, लंबी उधारी
02:22जहां दुनिया के बाकी देश तेल देते हुए तुरंथ ही पैसा मांगते हैं वहीं इरान भारत को बुक्तान करने के
02:28लिए 60-90 दिनों का लंबा समय देता था।
02:31ये भारत की उर्जा सुरक्षा के लिए एक ऐसा मास्टर स्टोक था जिससे हमारा फॉरन एक्स्चेंज रिजर्व बच्टा था और
02:36देश में तेल की कीमते काबू में रहती थी।
02:39लेकिन फिर ट्रॉम्प सरकार की कड़े प्रतिबंदों के कारण भारत को ये तेल आयात मजबूरन रोकना पड़ा।
02:44अब सवाल उठता है क्या इरानी मंत्री के आते ही भारत में फिर से इरानी तेल की नदिया बहने लगेगी।
02:50जवाब है इतना आसान नहीं।
02:52क्योंकि पिछले कुछ सालों में भारत और तेल बाजार पूरी तरह बदल जुका है।
02:56आज भारत अपने जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा रश्या से डिसकाउंटेड रेट पर खरीद रहा है।
03:01इसके अलाबा भारत ने UA, साउधी अरब, खाड़ी के अन्य देशों और यहां तक की अफरिका और ब्राजिल से भी
03:07अपनी तेल आयात को डाइवर्सिफाइड कर लिया है।
03:10यानि आज भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं।
03:13रेकिन इरान की एंट्री से ग्लोबल मार्केट में एक बड़ा बदलाव ज़रूर आया है।
03:16जैसे इस ट्रेट ओफ होलूस में तनाफ थोड़ा कम हुआ और इरान की तेल की बापसी की खबरे आई, कच्चे
03:22तेल के दामों में भारी गिरावट देखी गई है।
03:24ब्रेंट क्रूड घटकर 72 डॉलर प्रती बैरल की पास और WTI क्रूड 79 डॉलर प्रती बैरल के स्तर पर आ
03:31गया है।
03:32वेश्विक बजार में तेल की कीमते गिरने का सीधा फाइदा भारत को होगा, चाहे वो तेल इरान से खरीदे या
03:38कहीं और से।
03:39तो लबूल अब यह है कि इरान भारत के साथ दोबारा वो पुरानी दोस्ती शुरू करने के लिए पूरी तरह
03:44पलके बिचाए बैठा है।
03:46साथ दिनों की ये महुलत एक बहुत बड़ा मौका है।
03:49भारत अपनी उर्जा सुरक्ष्रा और देश की जुनता को सस्ता पेट्रोल डीजल देने के लिए हर विकल्प खुला रखना चाहता
03:54है।
03:55लेकिन अमेरिका के प्रती बंदों और रूस के साथ मौजूदा दोस्ती को देखते हुए भारत बहुत फूख-फूख कर कदम
04:00बढ़ाएगा।
04:01अब देखना ही होगा कि दिल्ली की इन बंद कमरोखी मुलाकातों से क्या नतीजा निकलता है।
04:06क्या भारत अमेरिकी प्रती बंदों की परवा की बिना अपने पुराने दोस्त इरान का हाथ थामेगा या फिर रूस और
04:12खाड़ी देशों के साथ बने गई सम्मी करणों को ही तबज्जु देगा।
04:16क्या इस बार का रुपिया तेल का खेल भारत को वैश्वी कूट जा महाशक्ती के रूप में स्थापित कर पाएगा।
04:23इस बड़े कूट नीतिक शत्रेंच की अगली चाल पर हमारी नजर बनी रहेगी आप देखते रहें वान इडिया।
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