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Is Iran set to make a comeback as one of India's major oil suppliers? A statement by Iranian Petroleum Minister Mohsen Paknejad, who arrived in New Delhi for the BRICS Energy Ministers' Meeting, has reignited speculation about renewed India-Iran energy ties. Iran has expressed its willingness to expand cooperation with India in the oil and gas sector and explore new opportunities during a special 60-day waiver period.

In this video, we explain how India once benefited from importing Iranian crude through the rupee-rial payment mechanism, barter trade, free shipping, and extended credit facilities—arrangements that significantly reduced India's energy costs.

क्या भारत में एक बार फिर ईरानी तेल की वापसी होने जा रही है? BRICS ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के लिए दिल्ली पहुंचे ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पाकनेजाद के बयान ने इस सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है। ईरान ने भारत के साथ तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है और 60 दिनों की विशेष छूट के दौरान नए अवसर तलाशने की बात कही है। इस वीडियो में जानिए कैसे कभी भारत और ईरान के बीच रुपया-रियाल भुगतान व्यवस्था, बार्टर सिस्टम, मुफ्त शिपिंग और लंबी क्रेडिट सुविधा जैसे समझौते भारत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुए थे। साथ ही समझिए कि आज रूस, सऊदी अरब और अन्य देशों से तेल आयात के बीच भारत के सामने क्या नई चुनौतियां और अवसर हैं। क्या ईरानी तेल की वापसी से पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा? अमेरिका के प्रतिबंध, वैश्विक तेल बाजार और भारत की ऊर्जा रणनीति पर इस खास रिपोर्ट में जानिए पूरी कहानी।
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~HT.178~PR.516~ED.276~GR.538~VG.HM~

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00:00कि दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक और आथिक शत्रंज के बौड पर एक ऐसी चाल चली जा चुकी है जो
00:06भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों की पूरी तस्वीर बदल देगी।
00:09क्या भारत के बजार में एक बर फिर इरानी तेल की नदिया बहने वाली है।
00:13दिल्ली के सियासी गलियारों में इस वक्त एक ऐसी हल चल है जिसकी गूँज वाशिंग्टन से लेकर मौस्को तक सुनाई
00:19दे रही।
00:20देशों के उर्जा मंत्रियों की बैठक के बहाने इरान के पेट्रोले मंत्री मौसीन पाकनिजाद दिल्ली पहुँचे।
00:27लेकिन असली खेल इस बैठक के पीछे चल रही बाइलेटरल टॉक्स में छिपा है।
00:31आते ही इरानी मंत्री ने एक ऐसा धमाका किया है जिसने वैश्विक तेल बजार में तेहलका मचा दिया है।
00:36इरान के तेल मंत्री मौसीन पाकनिजाद ने दिल्ली आते ही साफ कर दिया है कि इरान भारत के साथ आर्थिक
00:43और खास कर उजच हीतर में हर संभव सहयोग के लिए पूरी तरह तयार है।
01:06इरान भारत के साथ तेल और गयास सेक्टर में नए निवेश और सप्लाई को फिर से बहाल करना चाता है।
01:12इस पूरी डील की कहराई को समझने के लिए आए आपको इतिहास के उस दौर में ले चलते हैं जब
01:17इरान पर अमेरिका पृतिबंद नहीं लगे थे।
01:20साल 2018-19 से पहले एरान भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश हुआ करता था।
01:26और जानते हैं क्यों? क्योंकि भारत और इरान के बीच एक ऐसी वेवस था थी जिसने अमेरिकी डॉलर की छुट्टी
01:32गर्दी थी।
01:33आए आपको इसके चार बड़े फाइदे समझाते हैं।
01:36पहला रुपए में पेमेंट भारत इरान से जो भी तेल खरीता था उसका 45 प्रतीशत भुकतान डॉलर में नहीं बलकि
01:43सीधे हमारी अपनी करेंसी यानि भारती रुपए में होती थी।
01:47इसके लिए भारत के एक बैंक, UCO बैंक में इरान का विशेश हाता खोला गया था।
01:52दूसरा, बार्टर सिस्टम। इरान उस रुपए का इस्तिमाल भारत से बासमती चावल, गेहू, चीनी, चाय और दवाया खरीदने के लिए
02:00करता था।
02:00एनि भारत का पैसा गूंकर वापस भारत के ही किसानों और व्यपारियों के पास आ जाता था।
02:06हमारी एकॉनिमी को डबल फाइदा होता था।
02:09तीसरा, फ्री शिपिंग और इंशरन्स
02:11एरान भारत को तेल बेचने के लिए इतना बेताब रहता था कि वो भारतिये डिफाइनरी को मुफ्त में समुदरी जहाज
02:17और मुफ्त बीमा की सुविदा खुद देता था।
02:20चौत था, लंबी उधारी
02:22जहां दुनिया के बाकी देश तेल देते हुए तुरंथ ही पैसा मांगते हैं वहीं इरान भारत को बुक्तान करने के
02:28लिए 60-90 दिनों का लंबा समय देता था।
02:31ये भारत की उर्जा सुरक्षा के लिए एक ऐसा मास्टर स्टोक था जिससे हमारा फॉरन एक्स्चेंज रिजर्व बच्टा था और
02:36देश में तेल की कीमते काबू में रहती थी।
02:39लेकिन फिर ट्रॉम्प सरकार की कड़े प्रतिबंदों के कारण भारत को ये तेल आयात मजबूरन रोकना पड़ा।
02:44अब सवाल उठता है क्या इरानी मंत्री के आते ही भारत में फिर से इरानी तेल की नदिया बहने लगेगी।
02:50जवाब है इतना आसान नहीं।
02:52क्योंकि पिछले कुछ सालों में भारत और तेल बाजार पूरी तरह बदल जुका है।
02:56आज भारत अपने जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा रश्या से डिसकाउंटेड रेट पर खरीद रहा है।
03:01इसके अलाबा भारत ने UA, साउधी अरब, खाड़ी के अन्य देशों और यहां तक की अफरिका और ब्राजिल से भी
03:07अपनी तेल आयात को डाइवर्सिफाइड कर लिया है।
03:10यानि आज भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं।
03:13रेकिन इरान की एंट्री से ग्लोबल मार्केट में एक बड़ा बदलाव ज़रूर आया है।
03:16जैसे इस ट्रेट ओफ होलूस में तनाफ थोड़ा कम हुआ और इरान की तेल की बापसी की खबरे आई, कच्चे
03:22तेल के दामों में भारी गिरावट देखी गई है।
03:24ब्रेंट क्रूड घटकर 72 डॉलर प्रती बैरल की पास और WTI क्रूड 79 डॉलर प्रती बैरल के स्तर पर आ
03:31गया है।
03:32वेश्विक बजार में तेल की कीमते गिरने का सीधा फाइदा भारत को होगा, चाहे वो तेल इरान से खरीदे या
03:38कहीं और से।
03:39तो लबूल अब यह है कि इरान भारत के साथ दोबारा वो पुरानी दोस्ती शुरू करने के लिए पूरी तरह
03:44पलके बिचाए बैठा है।
03:46साथ दिनों की ये महुलत एक बहुत बड़ा मौका है।
03:49भारत अपनी उर्जा सुरक्ष्रा और देश की जुनता को सस्ता पेट्रोल डीजल देने के लिए हर विकल्प खुला रखना चाहता
03:54है।
03:55लेकिन अमेरिका के प्रती बंदों और रूस के साथ मौजूदा दोस्ती को देखते हुए भारत बहुत फूख-फूख कर कदम
04:00बढ़ाएगा।
04:01अब देखना ही होगा कि दिल्ली की इन बंद कमरोखी मुलाकातों से क्या नतीजा निकलता है।
04:06क्या भारत अमेरिकी प्रती बंदों की परवा की बिना अपने पुराने दोस्त इरान का हाथ थामेगा या फिर रूस और
04:12खाड़ी देशों के साथ बने गई सम्मी करणों को ही तबज्जु देगा।
04:16क्या इस बार का रुपिया तेल का खेल भारत को वैश्वी कूट जा महाशक्ती के रूप में स्थापित कर पाएगा।
04:23इस बड़े कूट नीतिक शत्रेंच की अगली चाल पर हमारी नजर बनी रहेगी आप देखते रहें वान इडिया।
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