00:00Sun 1984ü reati ke tdi eek bukantar 30 minat Mumbai ke diğer il alongsideMmme ki spanning
00:05ők Tung sewith galhhion
00:06çekea ç mhen divaro reinforce tahin jaysay koi adrish a Hath chuk-chaap downik
00:11Sutak dya rahat ho
00:12Uus galhi ke akhiri chorhårpar surge1 strict light bar bar restore
00:16będzieous itimArt bakalım
00:17Και usi timtimati reosunice maya aadmii siya divaro lambambo hota a ra ambitions
00:21Yudah olmade ee koi undergraduate insan nahin to
00:24Iskan namto rahim khān
00:26equip Johns se arak 부탁
00:3020 سال پہلے یہی رحیم ایک مچوارے کا بیٹا تھا,
00:33جو بھنڈی بازار کی سڑکوں پر بھوکھا سوتا تھا
00:35اور آج وہی رحیم ممبئی کی راتوں کا مالک بن چکا تھا.
00:39اس کی آنکھوں میں جو تھندک تھی, وہ کسی آم اپرادھی کی نہیں تھی,
00:43وہ اس انسان کی آنکھیں تھی جس نے زندگی کو بہت قریب سے مرتے دیکھا تھا
00:47اور پھر خود موت بن کر لوگوں کے سامنے کھڑا ہو گیا تھا.
00:50This is the story of the story of Raheem.
01:21She was too close to the person she became a real estate in himself and then she was has a
01:25good chance to get out of here and then she got off the record.
01:26She left the house and she left the house.
01:28She took a chance to take off on the husband's house.
01:31He got off the people and left her house and took the house and filmed the house.
01:32She was in contact with him to help her and raising the house too.
01:34She was too close to her family also.
01:37She was too close to her mother's house.
01:40She was too close.
01:42She was also a good family.
01:45She got close to her.
01:47Then he tried to get a chance to spend time
01:49on TV, he, and he ran back home,
01:51and the city had killed.
01:55He gave his mind to spend time on TV.
02:04And his wife told him she kept
02:09going on TV.
02:13But he said,
02:16he never asked her to do it.
02:17. . . .
02:47शेर की खाल निकाल कर लटकाएगा और यह बात रहीम खान तक भी पहुँच गई थी
02:521986 की एक दोपहर भिंडी बाजार के एक चाय के खोखे पर रहीम खान और जोसेफ परेरा आमने सामने बैठे
02:58थे
03:00चाय की प्यालियों से उठती भाब के बीच रहीम ने धीरे से कहा था कि शहर में एक नया खत्रा
03:05पैदा हो गया है
03:05और इस बार खत्रा पुलिस की वर्दी में चल कर आया है
03:09उस दिन के बाद से रहीम खान और इंस्पेक्टर साथे के बीच एक ऐसा खेल शुरू हुआ जिसमें हर चाल
03:15जान पर खेली जाती थी
03:16साथे ने रहीम के तीन गोदामों पर एक ही रात में चापे मारे और रहीम ने जवाब में साथे के
03:22सबसे भरोसे मंद मुखबिर को शहर के बीचों बीच दिन के उजाले में मार डाला
03:26ताकि पूरा शहर देख ले कि शेर किसी से नहीं डरता
03:29मगर सकता की इस लडाई में एक तीसरा खिलाडी भी चुपचाप अपनी चाले चल रहा था
03:34यहाँ खिलाडी था खुद रहीम के अंदर का खौफ यह डर की कहीं उसका सबसे करीबी दोस्त जोसेफ ही उसकी
03:40पीठ में चुरा नगोंप दे
03:41यह शक उस दिन और गहरा हो गया जब रहीम को पता चला कि जोसेफ की एक गुप्त मुलाकात इंस्पेक्टर
03:48साथे के एक हवलदार से हुई थी
03:50रहीम ने उस रात नींद में भी अपनी आखे बंद नहीं की
03:54वह बार-बार खुद से सवाल करता रहा कि क्या वह आदमी जिसके लिए उसने अपनी जान तक दाफ पर
04:00लगाई थी
04:00अब उसी की जान का सौदा कर रहा था
04:031987 की एक उमस भरी शाम, मुंबई के माहिम इलाके में समुद्र की लहरें किनारे से टकरा कर एक अजीव
04:09सी सिस्की जैसी आवाज निकाल रही थी
04:12रहीम खान अपने अड़े की छट पर अकेला खड़ा था, हाथ में सिग्रेट जलती रही, मगर उसका ध्यान कहीं दूर
04:18था
04:32उसने कहा कि जोसेफ पर 2400 घंटे नजर रखी जाएं, मगर उसे इस बात की भनक भी नहीं लगनी चाहिए
04:38कि उस पर शक किया जा रहा है
04:41अगले कुछ हफ्तों में शहर में खून की एक नई लहर शुरू हो गई
04:45इंस्पेक्टर साथे ने एक चाल चली, उसने जानबूच कर यह खबर फैलादी कि रहीम खान का कोई बहुत करीबी आदमी
04:51ही पुलिस को अंदर की खबरे दे रहा है
04:54यह खबर जंगल की आग की तरह फैली और रहीम के गैंग में हर कोई एक दूसरे को शक की
04:58नजर से देखने लगा
05:00साथे जानता था कि अगर वह रहीम को सीधे नहीं पकड़ सकता तो उसे अंदर से तोड़ सकता है
05:06यही उसकी सबसे बड़ी चाल थी भरोसे को हथियार बनाना और यह चाल काम कर गई
05:12रहीम खान जो कभी ठंडे दिमाग से हर फैसला लेता था अब शक के साये में जीने लगा
05:17उसने अपने ही आदमियों से दूरी बनानी शुरू कर दी, रातों को अकेला जाता, हर आहट पर चौक जाता
05:24एक रात भायखला के एक पुराने गोडाम में रहीम और जोसेफ की आखिरी मुलाकात हुई जिसका जिकर शहर की हर
05:30पुरानी कहानी में आता है
05:33बारिश तेज थी, गोडाम के टूटे शेड से पानी की गूंदे सीधे जमीन पर गिर रही थी, और एक धुंधले
05:38बल्ब की रोशनी में जोसेफ का चहरा आधा अंधेरे में डूबा हुआ था
05:42रहीम ने सीधे सवाल किया कि क्या उसने पुलिस से कोई सौदा किया है
05:47जोसेफ ने इनकार किया, बार-बार कसम खाई की वह कभी गद्दारी नहीं करेगा, मगर उसकी आँखों में एक हिचकी
05:53चाहट थी, जो रहीम जैसे आदमी से छिप नहीं सकती थी
05:57उस रात रहीम ने कोई फैसला नहीं सुनाया, मगर गोदाम से निकलते वक्त उसने एक बात मन में तै कर
06:02ली थी
06:03ठीक तीन दिन बाद, इंस्पेक्टर साथे को एक गुमनाम फोन आया जिसमें रहीम खान के एक गुप ठिकाने का पता
06:09दिया गया
06:10साथे को यकीन नहीं हुआ कि इतनी बड़ी खबर अचानक कैसे मिल गई, मगर मौका बहुत बड़ा था
06:16इसलिए उसने अपनी पूरी टीम के साथ उस रात छापा मारने की तयारी कर ली
06:20यह वही रात थी, 1988 की एक काली, बारिश से भीगी रात, जब मुंबई के इतिहास का सबसे बड़ा एंकाउंटर
06:27होने वाला था
06:29साथे और उसकी टीम भाय खला के उस गोदाम के बाहर अंधेरे में दबे बैठे थे, बंदू के दमी हुई,
06:34सांसे थमी हुई
06:36ठीक रात के दो बजे गोदाम का गेट खुला, और भीतर से एक परिचित सिल्हूट बाहर निकला
06:41मगर यहां कहानी एक ऐसा मोड लेती है, जो आज तक अंसुलजा है
06:46उस रात गोदाम के बीटर गोदियों की आवाजे गुझी, इतनी तेज की आसपास के मचुआरों की बस्ती तक खिल गई,
06:52जब कुलिस की टीन भीतर दाखिल हुई, तो फर्ष खून से लाल था, मगर रहीम खान का शरीर वहां नहीं
06:57था
06:58सिर्फ उसका वही गोल्ड चेन वाला पेंडेंट खून में डूबा हुआ जमीन पर पड़ा मिला, और उसके बगल में जोसेफ
07:04परेरा का शरीर, सीने में तीन गोलिया, आखें खुली हुई, जैसे आखिरी पल में उसने कुछ कहना चाहा हो, मगर
07:10कह नहीं पाया
07:11इंस्पेक्टर साथे ने अगले कई महीनों तक रहीम खान को जिन्दा या मुर्दा ढूंडने की कोशिश की
07:16कुछ लोग कहते थे कि शेर उस रात गोदाम के पीछे वाले नाले से होकर समुद्र तक पहुँच गया और
07:22किसी मचवारे की नाव से शहर से बाहर निकल गया
07:53।
07:54उस गोदाम में जोसेफ परेरा वाकई गदार था या वह सिर्फ रहीम को बचाने के लिए खुद गोली खा गया
08:00यह राज आज भी अंधेरे में दफन है और शायद यही उस रात की सबसे बड़ी सक्चाई है कि कुछ
08:06कहानिया कभी खत्म नहीं होती
Comments