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  • 5 hours ago
असम के कामाख्या मंदिर में वार्षिक अंबुबाची महायोग उत्सव की शुरुआत हो गई है. यह देवी पर्व कामाख्या के वार्षिक रजस्वला काल का प्रतीक माना जाता है और देवी नारी शक्ति के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. देश के 51 शक्तिपीठ इस पवित्र मंदिर में अगले तीन दिन तक विशेष धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होंगे, जो मंदिर के कपाट भक्तों के लिए बंद रहेंगे. कपाट बंद होने से पहले हजारों भक्तों ने दर्शन कर पूजा की- आशीर्वाद की. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में धरती की उर्वरता बढ़ती है. 26 जून को विशेष पूजा और स्नान अनुष्ठान के बाद मंदिर के द्वार दोबारा खोले जाएंगे, जिसे ‘निवृत्ति’ कहा जाता है.

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Transcript
00:02असम के घुवाहाती में सुहुवारात को मा कामाख्या के मंदर में आस्था और भक्ति के साथ सालाना, अंबुबाजी, महायोग उत्सव
00:10की शुरुवात हुई
00:11ये उत्सव देवी कामाख्या के सालाना मासिधार चक्र का प्रफिक है
00:16Hindu Parampara में इस दैविये नारी शक्ति के पिहार के रूप में मनाया जाता है
00:21देश के 51 शक्ति पीटो में से एक इस पंदर में देवी सती के गर्व ग्रहम की पूजा होती है
00:28मानिता है कि इस वक्त धर्ती उपजाओ हो जाती है
00:46और अपना पाथना से मा का सरन में रखिए और हमारा हिसाब से पुरूंद तरह से ये पाथना सुईकार करेंगे
00:54मा
00:57अपसे तीन दिन तीन रात और सब्विस तरी को सुभा जब मा का सनान होंगे
01:02and after all the peace that happens, all the peace that comes in mind is closed and into a party.
01:15अगले तीन दिन और रात के लिए मंदर के कपाट बंद होनी से पहले हजारों भक्तों ने माका माख्या के
01:22दर्शन किये
01:23इस दौरान मंदर के बाहर शद्धालू ने पूजा पाट और विशेश अनुष्ठान किये
01:3226 जून को मंदर के कपाट फिर से खुलेंगे इसे निब्रिक्ती कहा जाता है ये एकांतवास की अब्दी के अंध
01:39का प्रतीक है
01:40इसके बाद भक्त फिर से मंदर में प्रवेश कर सकेंगे और माका माख्या का आशरवाद ले सकेंगे
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