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Muharram 2026: 9 और 10 मुहर्रम (आशूरा) का रोज़ा कैसे रखें? क्या यह ज़रूरी है? जानिए इसकी सही नीयत, सही तरीक़ा, फ़ज़ीलत और महत्व क़ुरान और सहीह हदीस की रोशनी में। उलेमा की राय और इस साल की सही तारीख़ों के साथ पूरी जानकारी के लिए यह 4 मिनट का वीडियो ज़रूर देखें और सुन्नत पर अमल करें। वीडियो को लाइक और शेयर करना न भूलें!

Muharram 2026: How to observe the 9th and 10th Muharram (Ashura) fast? Is it compulsory? Learn the correct method, Niyyah, and significance based on authentic Quran and Sahih Hadith. Get complete guidance with scholars' views and correct dates for 2026 in this video. Watch till the end and don't forget to like, share, and subscribe!


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~HT.504~PR.115~ED.464~VG.HM~

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Transcript
00:04ईस्लामिक नए साल का पेहला महीना यानि मोहर्रम अलब हराम शुरू हो चुका है
00:08कुरान करीम के सुरा अल तौबा यानि आयत नमबर 26 के मताब liquidsSpinallai ने साल के 12 महीनों में से
00:144 महीने को
00:15हुर्मत वाले यानि बेहत पाक महीने बताया है
00:17और महरम उनी में से एक है लेकिन अक्सर लोग पूछते हैं कि महरम के रोजे रखना क्यों जरूरी है
00:22नौ और दस महरम का रोजा कैसे रखा जाता है
00:25आज के इस वीडियो में हम कुरान सही हदीस और उलेमा की राय के मताबिक सब कुछ बहुत आसान शब्दों
00:30में समझेंगे
00:31सबसे पहले ये साफ करना जरूरी है कि महरम का रोजा रखना फर्ज यानि अनिवारे नहीं है
00:35इसलाम में सिर्फ रमजान के रोजे फर्ज हैं जबकि महरम का रोजा एक अवजल सुनत और नफल अबादत है यानि
00:41इसे रखने पर बहुत बड़ा सवाब मिलता है लेकि ना रखने पर कोई गुना नहीं होता
00:45सही मुसलिम हदीस नंबर 1163 में हज़रत अबू हुरैरा से रिवायत है कि अल्ला के रसूल ने फरमाया रमजान के
00:52बाद सबसे अवजल रोजे अल्ला के महीने महरम के हैं
00:56एक और हदीस सही मुसलिम 1162 में आप ﷺ ने फरमाया कि आज शूरा यानि दस महर्म का रोजा रखने
01:03से पिछले एक साल के छोटे गुना माफ हो जाते हैं।
01:05इसलिए भले ही ये फर्ज नहीं है पर इसका सवाब इतना ज्यादा है कि किसी भी मुसल्मान को इसे छोड़ना
01:10नहीं चाहिए।
01:10इसलामी की स्कॉलर बताते हैं कि जब पैगंबर मुहमत ﷺ मदینہ तश्रीफ लाए तो उन्होंने देखा कि यहूदी दस महर्म
01:17का रोजा रखते हैं।
01:18वज़ा पूशने पर पता चला कि इसी दिन अल्ला ने हज़रत मुसल्मान और बनी इसराईल को फिरॉन के जल्म से
01:24आजादी दिलाई थी इसके आभार में हज़रत मुसल्माने रोजा रखा था।
01:48ग्यारब महर्म का रोजा रखें। अगर कोई मजबूरी हो तो सिर्फ दस महर्म का रोजा रखना भी जायज है पर
01:53दोनों रखना सुन्नत है।
02:18जैसे जूट बोलना चुगली करना या गुस्सा करना से पूरी थाना बचें।
02:22इफ्तार शाम को मगर्ब की आजान के वक्त सूरज डूपते ही खजूर या पानी से रोजा खोलें और ये दूआ
02:27पड़ें।
02:38लोग उनकी इस महान कुर्बानी को हमेशा याद करते हैं और उनके लिए दूआ करते हैं लेकिन दियान रखें।
02:43आशूरा के रोज़े की शुरुवात हजरत मुसा अले सलाम के जमाने से हैं इसलिए रोजा रखने की नियत सिर्फ अल्ला
02:48की रजा और सुन्नत पर आमल करना होना चाहिए।
02:50उमेदे आपको ये जानकारी पसंद आई होगी वीडियो को लाइक करें शुर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिलकुल न
02:55भूलें।
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