00:04इसकी खास आवाज सदियों से असम के गावों में गुंचती रही है और ये त्योहारों के जश्न और राज्य की
00:11सांस्कृतिक पहचान का एक एहम हिस्सा है
00:16अब असम के सबसे मशूर पारंपरेग वाद्य यंत्रों में से एक बीहु पेपा को जियोग्राफिकल इंडिकेशन यानि जियाई टैग मिला
00:24है
00:24इससे बीहु पेपा को अपनी अनोखी सांस्कृतिक विरासत के लिए राश्ट्रिय पहचान मिली है
00:32गोला गाट में इस घोशना का गर्व की साथ स्वागत किया गया है
00:35जहां कारिगरों की कई पीडियों ने हाथ से इस वादय यंत्र को बनाने की परंपरा को जिन्दा रखा है
01:15पारमपरिक रूप से भैस की सींग से बनाय जाने वाले और बास के माउथ पीस वाले पैपा को पीडियों से
01:21चलिया रही तक्नीकों का अस्तेमाल करके बहुत बारिकी से हाथ से बनाया जाता है
01:28कारिगरों और लोक कलाकारों का मानना है कि जियाई पहचान से इस परमपरा को बचाने इसके बारे में जागरुपता बढ़ाने
01:36और आने वाली पीडियों को इस लोक वादेयंत्र को सीखने के लिए फ्रोचसाहित करने में मदद मिलेगी
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