00:26पर्षवगाई का आशा भोसले
00:35पर्षवगाई का आशा भोसले अलाइफ इन म्यूजिक विस्तार से लिखा है
00:41उन्होंने खाने और महमानों की पती आशा भोसले के प्यार को वया किया है
00:47मेलोडी क्वीन के दोस्त और उनके साथ काम करने वाले उन्हें ना सिर्फ बत और गाईका बल्कि एक बहतरीन मेजवान
00:55के रूप में भी याद करते हैं
00:57फिल्म निर्माता रमेश सिप्पी ने उनकी पाक कला को याद करते हुए कहा कि रसोई में उनकी कलाकारी एक गाईका
01:05के रूप में उनकी प्रतिबा के बराबर थी
01:13आज इतने वर्षों बाद उन्हें केबल सने से ही याद किया जा सकता है और यकीन मानिये वो एक वेहतरीन
01:20कुक थी
01:21अगर आप उनकी आवाज से खेल सकते तो वो अपने बेंजनों से भी उतनी ही कुशलता से खेल सकती थी
01:32रमेश सिप्पी ने उन दिनों को याद किया जब वो अपनी पत्नी के साथ आशा भूसले के घर गये थे
01:39और उन्होंने खुद अपने हातों से उनके लिए खाना बनाया था
01:47जब हम वहाँ गए तब वो मेरे और किरन के लिए खाना बना रही थी और उन्हें अपने काम में
01:54पूरा आनन्द आता था वो खुद खाना परूस्ती भी थी ये वाकई अद्भुत था
02:03वो पताते हैं कि आशा जी का खाना भी उनके गायन की तरह ही लाजवाब था
02:13जी हाँ चाहे माटन हो या मचली चिकन हो या सबजियां सब कुछ बनाने में वो माहिर थी और मुझे
02:20लगता है कि या कॉम्बिनेशन लाजवाब था वो खुद खाना खिलाती थी
02:43वो बताती है कि खाना बनाने के साथ साथ उनकी महमान नवाजी वाके काबले तारिफ थी
02:55जी हाँ मैंने बहुत सुना है कि वो एक शांदार कुक थी सचमुष शांदार
03:00आप जानते हैं मैंने कई लोगों से सुना है कि उन्हें दूसरों को खाना खिलाना बहुत पसंद था
03:06जो भी उनके घर जाता उसे बहतरीन खाना मिलता था वो बहुत अच्छी कुक थी
03:11कुल मिलाकर उन्होंने सचमुच अपनी जीवन को पूरी तरह से जिया है
03:21संगीत का शमे टंडन भी उनके खाने के बहुत बड़े प्यान है
03:26मैं उन्हें आई कहकर बुलाता था
03:29जब भी मैं उनके घर जाता
03:31मैं उनके हाथ का बना गर्मा गरम पोहा खाता था
03:47किताब में लिखा है कि उन्हें पारंप्रिक भारती व्यंजन बनाना बेहत पसंद था
03:53वो अपने गानों की तरह ही खाने में नए नए प्रयोप करती थी और कई तरह के व्यंजन बनाती थी
04:02अपने जीवन के आकरी सालों में भी उन्हें परिवार और दोस्तों के लिए खाना बनानी में आनंदाता था
04:09खास मौकों पर वो खुद ही रसोई में खाना पकाती थी
04:16आशा बोसले की विरासत संगी जगत में उनकी मधुर आवास तक ही सिमित नहीं है
04:22बलकि वो लजीज खाने और उनकी महमान नवाजी में भी जलती थी
04:27उनकी कला और इसमे को गैराई से समझने वाले उनकी करीबी और दोस्त इसे सदा के लिए संजू कर रखेंगे
04:43झाल
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