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  • 7 minutes ago
'मेलिडी क्वीन'.. आशा भोसले आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी मधुर आवाज कई पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध करती रहेगी. जो लोग उन्हें करीब से जानते थे, उनके लिए आशा भोसले का जादू रिकॉर्डिंग स्टूडियो से लेकर रसोई के जायके तक फैला हुआ था. 92 साल की पार्श्व गायिका आशा भोसले... संगीत के साथ-साथ खाना बनाने की कला में भी माहिर थीं. उनके इस हुनर को लेखिका राम्या शर्मा ने अपनी किताब- "आशा भोसले: ए लाइफ इन म्यूजिक" विस्तार से लिखा है. उन्होंने खाने और मेहमानों के प्रति आशा भोसले के प्यार को बयां किया है. 'मेलिडी क्वीन' के दोस्त और उनके साथ काम करने वाले उन्हें न सिर्फ बतौर गायिका, बल्कि एक बेहतरीन मेजबान के रूप में भी याद करते हैं. फिल्म निर्माता रमेश सिप्पी ने उनकी पाक कला को याद करते हुए कहा कि रसोई में उनकी कलाकारी एक गायिका के रूप में उनकी प्रतिभा के बराबर थी. 

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Transcript
00:26पर्षवगाई का आशा भोसले
00:35पर्षवगाई का आशा भोसले अलाइफ इन म्यूजिक विस्तार से लिखा है
00:41उन्होंने खाने और महमानों की पती आशा भोसले के प्यार को वया किया है
00:47मेलोडी क्वीन के दोस्त और उनके साथ काम करने वाले उन्हें ना सिर्फ बत और गाईका बल्कि एक बहतरीन मेजवान
00:55के रूप में भी याद करते हैं
00:57फिल्म निर्माता रमेश सिप्पी ने उनकी पाक कला को याद करते हुए कहा कि रसोई में उनकी कलाकारी एक गाईका
01:05के रूप में उनकी प्रतिबा के बराबर थी
01:13आज इतने वर्षों बाद उन्हें केबल सने से ही याद किया जा सकता है और यकीन मानिये वो एक वेहतरीन
01:20कुक थी
01:21अगर आप उनकी आवाज से खेल सकते तो वो अपने बेंजनों से भी उतनी ही कुशलता से खेल सकती थी
01:32रमेश सिप्पी ने उन दिनों को याद किया जब वो अपनी पत्नी के साथ आशा भूसले के घर गये थे
01:39और उन्होंने खुद अपने हातों से उनके लिए खाना बनाया था
01:47जब हम वहाँ गए तब वो मेरे और किरन के लिए खाना बना रही थी और उन्हें अपने काम में
01:54पूरा आनन्द आता था वो खुद खाना परूस्ती भी थी ये वाकई अद्भुत था
02:03वो पताते हैं कि आशा जी का खाना भी उनके गायन की तरह ही लाजवाब था
02:13जी हाँ चाहे माटन हो या मचली चिकन हो या सबजियां सब कुछ बनाने में वो माहिर थी और मुझे
02:20लगता है कि या कॉम्बिनेशन लाजवाब था वो खुद खाना खिलाती थी
02:43वो बताती है कि खाना बनाने के साथ साथ उनकी महमान नवाजी वाके काबले तारिफ थी
02:55जी हाँ मैंने बहुत सुना है कि वो एक शांदार कुक थी सचमुष शांदार
03:00आप जानते हैं मैंने कई लोगों से सुना है कि उन्हें दूसरों को खाना खिलाना बहुत पसंद था
03:06जो भी उनके घर जाता उसे बहतरीन खाना मिलता था वो बहुत अच्छी कुक थी
03:11कुल मिलाकर उन्होंने सचमुच अपनी जीवन को पूरी तरह से जिया है
03:21संगीत का शमे टंडन भी उनके खाने के बहुत बड़े प्यान है
03:26मैं उन्हें आई कहकर बुलाता था
03:29जब भी मैं उनके घर जाता
03:31मैं उनके हाथ का बना गर्मा गरम पोहा खाता था
03:47किताब में लिखा है कि उन्हें पारंप्रिक भारती व्यंजन बनाना बेहत पसंद था
03:53वो अपने गानों की तरह ही खाने में नए नए प्रयोप करती थी और कई तरह के व्यंजन बनाती थी
04:02अपने जीवन के आकरी सालों में भी उन्हें परिवार और दोस्तों के लिए खाना बनानी में आनंदाता था
04:09खास मौकों पर वो खुद ही रसोई में खाना पकाती थी
04:16आशा बोसले की विरासत संगी जगत में उनकी मधुर आवास तक ही सिमित नहीं है
04:22बलकि वो लजीज खाने और उनकी महमान नवाजी में भी जलती थी
04:27उनकी कला और इसमे को गैराई से समझने वाले उनकी करीबी और दोस्त इसे सदा के लिए संजू कर रखेंगे
04:43झाल
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